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Thursday, 26 September 2013

रविकर कर आराम, बैठ प्रभुसत्ता नाशो -


न्यूज रूम का पारा पचास के पार !


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मौका देकर कर रहे, सम्पादक एहसान |
गाली देकर इसलिए, कर जाते अपमान |

कर जाते अपमान, नरम अपनाय रवैया |
करें व्यक्ति उत्थान, अन्यथा ता ता थैया |

तिगनी नाच नचाय, लगा जायेंगे चौका |
रविकर बंधुवा नाय, मिले बाहर भी मौका-


सपने !!! ( कविता )


"आकांक्षा के पर क़तर, तितर बितर कर स्वप्न |

दुःख अपने जो दें अगर, निश्चय बड़े कृतघ्न || 


पंचों से फैसला करा के ,मम्मी पापा बाँट लिए -सतीश सक्सेना

सतीश सक्सेना 







काम मिल गया दोनों को ही फिर जिंदड़ी आसान हुई -
पुन: बुढ़ापा आहें भरता, तन्हाई मेहमान हुई |


दिल्ली की ही देन, बड़े आतंकी नक्सल

नक्सल ने नेता हने, गर्म दिखे युवराज |
छत्तिसगढ़ सरकार को, कोस रहे हैं आज |

कोस रहे हैं आज, आज ही घुस आतंकी |
मारे सैनिक ढेर, नहीं बोले पर बंकी |

नहीं दिखे अब शर्म, काम नहिं करती अक्कल |
दिल्ली की ही दे, बड़े आतंकी नक्सल ||



सियासती सुपनखा से, सिया-सती अनभिज्ञ-
सियासती सुपनखा से, सिया-सती अनभिज्ञ |
अब क्या आशा राम से, हो रहे स्खलित विज्ञ |


हो रहे स्खलित विज्ञ, बने खरदूषण साले |

घालमेल का खेल, बुराई कुल अपना ले |



नित आगे की होड़, रखेंगे बढ़ा ताजिया |

सिया सती की लाज, बचा ले पकड़ हाँसिया ||

वर्धा ब्लॉगर सम्मलेन -जो किसी ने नहीं लिखा!

noreply@blogger.com (arvind mishra) 

मुर्गे की इक टांग से, कंठी माला टांग |
उटपटांग हरकत करे, कूद फांद फर्लांग |
कूद फांद फर्लांग , बांग मुर्गा जब देता |
पंडित करते स्वांग, ॐ बोले अभिनेता |
अभिनय में उस्ताद, सोचते हैं आगे की |
अगर गले ना दाल, तब टांग चले मुर्गे की || 


माटी - दोहे

माटी का पुतला पुन:, माटी में मिल जाय |
रविकर माटी डाल मत, कर उत्थान उपाय ||

काली कॉफ़ी पीजिये, कट जाने दो नाक-



लाशों पर टेबुल सजे, बैठे भारत पाक |
काली कॉफ़ी पीजिये, कट जाने दो नाक |

कट जाने दो नाक, करें हमले वे दैनिक |
मरती जनता आम, मरें सीमा पर सैनिक |

रविकर कर आराम, बैठ प्रभुसत्ता नाशो |
  फिर टकराओ जाम, अरी सरकारी लाशों || 

अगर शत्रु के नाम, बड़े आरोप लगाए -

कुटनी के करतूत से, कूटनीति नाकाम |
चालू है अब धूर्तता, पाई शक्ति तमाम |

पाई शक्ति तमाम, छूट अपराधी पाए |
अगर शत्रु के नाम, बड़े आरोप लगाए |

हेर फेर अज मेर, शेर की इज्जत लुटनी |
चूक हुई इस बार, फँसा देगी पर कुटनी ||

  

2 comments:

  1. सुंदर संयोजन सुंदर कुंडलियों के साथ !

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक आज शनिवार (28-09-2013) को ""इस दिल में तुम्हारी यादें.." (चर्चा मंचःअंक-1382)
    पर भी होगा!
    हिन्दी पखवाड़े की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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