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Saturday, 21 September 2013

समझ-बूझ हालात , लात ना खाओ खाली -


 घुसपैठ

Onkar
कविताएँ 
खाली कक्षा पाय के, कर बैठे घुसपैठ  । 
इतने विचलित क्यूँ हुवे, रहे व्यर्थ ही ऐंठ । 

रहे व्यर्थ ही ऐंठ , पलक पांवड़े बिछाओ । 
पल दो पल सुस्ताय, नाश्ता पानी लाओ । 

मीठी मीठी बात,  सरस भावों की प्याली । 
समझ-बूझ हालात , लात ना खाओ खाली ॥ 


सजाये मौत पहले बहस मौत के बाद !

Sushil Kumar Joshi 

नारि-सुरक्षा पर खड़े, यक्ष प्रश्न नहिं स्वच्छ |
सजा मीडिया कक्ष पर, मचता रहा अकच्छ |

मचता रहा अकच्छ, बचा नाबालिग मुजरिम |
लचर व्यवस्था नीति, सजा की गति भी मद्धिम |

आजादी की चाह, राह पर कड़ी परीक्षा |
कर लें स्वयं सलाह, तभी हो नारि-सुरक्षा ||



अफजल हुआ फरार, मुलायम राहत पाए-

समाचार-
एम् एल ए भाजपा का, गिरफ्तार आभार |
आतंकी दुर्दांत पर,  अफजल हुआ फरार |

अफजल हुआ फरार, मुलायम राहत पाए |
ख़ुशी ख़ुशी सरकार, कई बिल पास कराये |

जनरल की अब जांच, संग मोदी के बैठे |
एम् पी में शिवराज, नहीं जानूं क्यूँ ऐंठे ||




मुर्गे बड़े सुकून में, जब से मँहगा प्याज |
झटके और हलाल से, मनुज मिटाते खाज |

मनुज मिटाते खाज, मुजफ्फर नगर बना के |
बिन हर्रे फिटकरी, प्याज बिन पर्व मना के |

पाते बेहतर स्वाद, लड़ाके रविकर गुर्गे |
नेताओं को दाद, बांग दे देते मुर्गे ||



देह देहरी दुर्ग, सुरक्षित शिशु-अबलायें -

कुण्डलियाँ छंद

जन्नत बन जाता जहाँ, बसते जहाँ बुजुर्ग ।
इनके रहमो-करम से, देह देहरी दुर्ग ।

देह देहरी दुर्ग, सुरक्षित शिशु-अबलायें ।
इनका अनुभव ज्ञान, टाल दे सकल बलाएँ ।

हाथ परस्पर थाम, मान ले रविकर मिन्नत ।
बाल-वृद्ध सुखधाम, बनायें घर को जन्नत।। 

11 comments:

  1. नारी खाप पंचायते जरूरी हैं !

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  2. नमस्कार आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (22-09-2013) के चर्चामंच - 1376 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  3. अजी कैसी सुरक्षा ,.......यही हकीकत है आज के भारत की यहाँ के नागर बोध की .सिविलिटी का पैमाना होता है किसी समाज में नारी का स्थान उसकी संरक्षा .

    ReplyDelete
  4. दुश्मन कोई भी सीने से लगाना नहीं भूले ,

    हम अपने बुजुर्गों का ज़माना नहीं भूले .

    जन्नत बन जाता जहाँ, बसते जहाँ बुजुर्ग ।
    इनके रहमो-करम से, देह देहरी दुर्ग ।

    देह देहरी दुर्ग, सुरक्षित शिशु-अबलायें ।
    इनका अनुभव ज्ञान, टाल दे सकल बलाएँ ।

    हाथ परस्पर थाम, मान ले रविकर मिन्नत ।
    बाल-वृद्ध सुखधाम, बनायें घर को जन्नत।।

    बढ़िया प्रस्तुति .

    ReplyDelete
  5. दुश्मन कोई भी सीने से लगाना नहीं भूले ,

    हम अपने बुजुर्गों का ज़माना नहीं भूले .

    जन्नत बन जाता जहाँ, बसते जहाँ बुजुर्ग ।
    इनके रहमो-करम से, देह देहरी दुर्ग ।

    देह देहरी दुर्ग, सुरक्षित शिशु-अबलायें ।
    इनका अनुभव ज्ञान, टाल दे सकल बलाएँ ।

    हाथ परस्पर थाम, मान ले रविकर मिन्नत ।
    बाल-वृद्ध सुखधाम, बनायें घर को जन्नत।।

    बढ़िया प्रस्तुति .

    ReplyDelete
  6. अजी कैसी सुरक्षा ,.......यही हकीकत है आज के भारत की यहाँ के नागर बोध की .सिविलिटी का पैमाना होता है किसी समाज में नारी का स्थान उसकी संरक्षा .

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  7. दुश्मन को भी सीने से ,लगाना नहीं भूले ,

    हम अपने बुजुर्गों का ज़माना नहीं भूले .

    जन्न

    त बन जाता जहाँ, बसते जहाँ बुजुर्ग ।
    इनके रहमो-करम से, देह देहरी दुर्ग ।

    देह देहरी दुर्ग, सुरक्षित शिशु-अबलायें ।
    इनका अनुभव ज्ञान, टाल दे सकल बलाएँ ।

    हाथ परस्पर थाम, मान ले रविकर मिन्नत ।
    बाल-वृद्ध सुखधाम, बनायें घर को जन्नत।।

    नारि-सुरक्षा पर खड़े, यक्ष प्रश्न नहिं स्वच्छ |
    सजा मीडिया कक्ष पर, मचता रहा अकच्छ |

    मचता रहा अकच्छ, बचा नाबालिग मुजरिम |
    लचर व्यवस्था नीति, सजा की गति भी मद्धिम |

    आजादी की चाह, राह पर कड़ी परीक्षा |
    कर लें स्वयं सलाह, तभी हो नारि-सुरक्षा ||

    अजी कैसी सुरक्षा ,.......यही हकीकत है आज के भारत की यहाँ के नागर बोध की .सिविलिटी का पैमाना होता है किसी समाज में नारी का स्थान उसकी संरक्षा .

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  8. वाह बहुत खूब-
    सुंदर प्रस्तुति

    सादर

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