59 साल की महिला सीईओ पर लगा यौन शोषण का आरोप, पांच पुरुष कर्मचारियों ने दर्ज कराया केस
chandan bhati
ठण्ड कलेजे पै गई, दर्ज हुआ जो केस |
नहीं धुले ये दूध के, जाने देश विदेश |
जाने देश विदेश, बड़ी अलबेली काकी |
किसमे कितना सेक्स, चाल चल जाय बला की |
पाण्डव का आभार, शिकायत जो हैं भेजे |
फँसी शिकंजे नारि, पड़ी इत ठण्ड कलेजे ||
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मरने की खातिर पुलिस, रोक सके के क़त्ल-
मरने की खातिर पुलिस, रोक सके के क़त्ल |
बनती नीति नितीश की, देखो सी एम् शक्ल |
देखो सी एम् शक्ल, हाथ पर हाथ धरे हैं-
हो हत्या अपहरण, नक्सली घात करे हैं |
नहीं रहा जूँ रेंग, हिलाया नहीं खबर ने |
सी एम् देते छोड़, पुलिस-पब्लिक को मरने ||
सीढ़ी कोने में खड़ी, इधर बड़ी सी लिफ्ट |
लिफ्ट लिफ्ट देती नहीं, सीढ़ी की स्क्रिप्ट |
सीढ़ी की स्क्रिप्ट, कमर में हाथ डालते |
चूमाचाटी होय, तनिक एहसास पालते |
किन्तु लगे ना दोष, तरुण की कैसी पीढ़ी |
फँसता तेज अधेड़, छोड़ देता ज्यों सीढ़ी ||
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बाला गर कश्मीर की, कर ले बाहर व्याह |
हक़ खोवे संपत्ति का, धारा बनी गवाह |
धारा बनी गवाह, तीन सौ सत्तर लगती |
अदालती आदेश, सुनंदा पुष्कर जगती |
चर्चा से इंकार, मचाये लोग बवाला |
तब मोदी के साथ, खड़ी कश्मीरी बाला ||
लिव इन रिलेशनशिप को कानूनन रोका जाये ..
Shalini Kaushik
चढ़े देह पर *देहला, देहात्मक सिद्धांत | लेशन लिव-इन-रिलेशनी, जीने के उपरान्त | जीने के उपरान्त, सोच क्या खोया पाया | हरदम रहे अशांत, स्वार्थ सुख आगे आया | त्याग समर्पण छोड़, ओढ़ ले चादर रविकर | है समाज का कोढ़, वासना चढ़े देह पर ||
*मद्य
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विकलांग आप है जिन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया !
अंधड़ !
दारुण दिखता दृश्य यह, गायब दोनों हाथ |
पैरों पर स्याही लगे, सत्साहस है साथ |
सत्साहस है साथ, अनोखा वोटर आया |
करता चोखा काम, एक सन्देश सुनाया |
धन्य धन्य विकलांग, देह से दीखे भारु |
लेकिन हैं कुछ लोग, मांगते पहले दारू ||
जमीन की सोच है फिर क्यों बार बार हवाबाजों में फंस जाता है
सुशील कुमार जोशी
बाज बाज आता नहीं, भरता रहे उड़ान | नीचे कुछ भाता नहीं, खुद पर बड़ा गुमान | खुद पर बड़ा गुमान, कहाँ उल्लू में दमखम | लेता आँखें मीच, धूप की ऐसी चमचम | पर गुरुत्व सिद्धांत, इक दूजे को खींचे | रख धरती पर पैर, लौट आ प्यारे नीचे || |
रविकर करता गौर, दाहिने रख पत्नी को-
(1)
पत्नी को भी छूट हो, अलग बिताये पाख |
प्रेमी प्यारा तड़पता, लगी दाँव पर साख |
लगी दाँव पर साख, दाख अब तो नहिं खट्टे |
राम राम इस पाख, श्याम फिर बोले पट्टे |
उपपत्नी का दौर, भाग्य से टूटो छींको |
रविकर करता गौर, दाहिने रख पत्नी को ||
(2)
बामांगी वह थी कभी, अभी दाहिनी ओर |
दुगुनी दिल की कोठरी, खाली बायाँ छोर |
खाली बायाँ छोर, ख़ुशी का मौसम आया |
भेजा कल पैगाम, उसे भी पास बुलाया |
लेकिन पीटे माथ, हुआ रविकर एकांगी |
घंटा घंटा बाँट, करे टोटे बामांगी ||
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सुंदर टिप्पणियाँ सुंदर सूत्र !
ReplyDeleteआभार 'जमीन की सोच है फिर क्यों बार बार हवाबाजों में फंस जाता है' को स्थान दिया !
सुंदर टिप्पणियाँ सुंदर सूत्र !
ReplyDeleteshukriya.
बहुत बढ़िया प्रस्तुति ...
ReplyDeleteवाह नान -लिविंग टुगेदर
ReplyDeleteबेहतरीन अभिव्यक्ति...!
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Recent post -: वोट से पहले .
पत्नी को भी छूट हो, अलग बिताये पाख |
ReplyDeleteप्रेमी प्यारा तड़पता, लगी दाँव पर साख |
लगी दाँव पर साख, दाख अब तो नहिं खट्टे |
राम राम इस पाख, श्याम फिर बोले पट्टे |
उपपत्नी का दौर, भाग्य से टूटो छींको |
रविकर करता गौर, दाहिने रख पत्नी को ||
वामांगी पत्नी हुई ,
प्रेमिका दक्षिणांग ,
लम्बी बहुत छलाँग
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
ReplyDelete--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
पर भी है!
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
ReplyDelete--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बृहस्पतिवार (05-12-2013) को "जीवन के रंग" चर्चा -1452
पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत बढियां प्रस्तुति , सुन्दर लिंक्स ..
ReplyDeleteअच्छी प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
ReplyDeleteनयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी