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Monday, 27 June 2011

शुक्रिया ||

पूरी   होती
मन  की  मुराद 
जब   चाह से  |
या  किसी 
बन्दे की 
सलाह से |
शुक्रिया 
कहता रहे ,
अल्लाह से  ||
कहता रहे ,
अल्लाह से  ||

रहमो-करम
से ही चले 
कायनात सारी--
मुश्किलें 
हटती गईं --
दिखती गई 

 

4 comments:

  1. अच्छी व्यंग्योक्ति है वक्रोक्ति भी .बधाई .

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  2. :):) कहना ही चाहिए शुक्रिया ..

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  3. सहज और सकारात्मक सोच है आपकी .झुककर काम करतें हैं आप फल से .लदे पेड़ से .

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  4. रहमो-करम
    से ही चले
    कायनात सारी--
    मुश्किलें
    हटती गईं --
    दिखती गई
    वो राह प्यारी ||
    --
    बहुत सुन्दर रचना!
    --
    रहमो-करम हो तो
    गधा भी पहलवान हो जाता है!

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