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Wednesday, 28 August 2013

वंशीधर का मोहना, राधा-मुद्रा मस्त-




वंशीधर का मोहना, राधा-मुद्रा मस्त । 
नाचे नौ मन तेल बिन, किन्तु नागरिक त्रस्त । 

किन्तु नागरिक त्रस्त, मगन मन मोहन चुप्पा । 
पाई रहा बटोर, धकेले लेकिन कुप्पा । 

बीते बाइस साल, हुई मुद्रा विध्वंशी । 
चोरों की बारात, बजाये रविकर वंशी ॥ 


नौ दो ग्यारह होय, निवेशक धन बहु-रूपया

रूपया छा-सठ में फँसा, उन-सठ से हैरान |
इक-सठ कब से मौन है, अड़-सठ सड़-सठियान |

अड़-सठ सड़-सठियान, तीन-तेरह हो जाता |
तीन-पाँच हर वक्त, पञ्च-जन माल खपाता |

मची हुई है लूट, रपट आती है खुफिया |
नौ दो ग्यारह होय, निवेशक धन बहु-रूपया ||


वे आतंकी रुष्ट, व्यर्थ हो जिनकी कसरत -

कसरत सी बी आय की, हो जाती बेकार |
मरती इशरत-जहाँ में, मोदी सर की कार |

मोदी सर की कार, बोल बैठा अमरीका |
लोहे की हे-डली, फ़िदायिन का ले ठीका |

सोमनाथ पर दृष्टि, उड़ाने की थी हशरत |
वे आतंकी रुष्ट, व्यर्थ हो जिनकी कसरत - 


ठेले बरबस खींचते, मन भर भर के प्याज

ठेले बरबस खींचते, मन भर भर के प्याज | 
पिया बसे परदेश में, यहाँ छिछोरे आज |

यहाँ छिछोरे आज, बड़ा सस्ता दे जाते |
रविकर नाम उधार, तकाजा करने आते |

आया है सन्देश, बड़े हो रहे झमेले |
जल्दी रुपये भेज, खड़े घर-बाहर ठेले - 


कैसे मुद्रा-पस्त, नहीं घर में हैं दाने-

कैडर से डर डर करे, कैकेयी कै-दस्त |
कैटभ कैकव-अपर्हति, कैसे मुद्रा-पस्त |

कैसे मुद्रा-पस्त, नहीं घर में हैं दाने |
कोंछे में वंचिका, चली जा रही भुनाने |

आये नानी याद, चाल चल रही भयंकर |
दे गरीब के नाम, करे खुश लेकिन कैडर ||

 कैकव-अपर्हति=असली बात बहाने से छिपाना 


भारत सरकार और डॉलर में होगी सीधी वार्ता

Kulwant Happy

बावन गज के थे सभी, लागा लंक कलंक |
रावण संरक्षक हुआ, तब से रहें सशंक |

तब से रहें सशंक, चला उन-सठ से आगे |
इक-सठ मोहन-मौन, करोड़ों लुटे अभागे |

डालर की अरदास, मिनट दो बारह बज के |
पर लौटे ना पास, कभी वह बावन गज के ||

3 comments:

  1. हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच} की पहली चर्चा हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-001 में आपका सह्य दिल से स्वागत करता है। कृपया पधारें, आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आपके नकारत्मक व सकारत्मक विचारों का स्वागत किया जायेगा | सादर .... Lalit Chahar

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