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Saturday, 31 August 2013

नाबालिग बच जाय, प्रवंचक साधु कहानी-

 मासूम नहीं रहे नाबालिग मुजरिम

टला फैसला दस दफा, लगी दफाएँ बीस |

अंध-न्याय की देवि ही, खड़ी निकाले खीस |

खड़ी निकाले खीस, रेप वह भी तो झेले |

न्याय मरे प्रत्यक्ष, कोर्ट के सहे झमेले |

नाबालिग को छूट, बढ़ाए विकट हौसला |
और बढ़ेंगे रेप, अगर यूँ टला फैसला ||

पाता पोती दुष्ट, और अज'माता ओरल-

रल-मिल दुर्जन लूटते, गैंग रेप कहलाय । 
हत्या कर के भी यहाँ, नाबालिग बच जाय । 

नाबालिग बच जाय, प्रवंचक साधु कहानी । 
नहीं करे वह रेप, मुखर-मुख की क्या सानी । 

छल बल *आशर बाढ़, मची काया में हलचल । 
पाता पोती दुष्ट, और अज'माता ओरल ॥ 
*राक्षस  


दिखा अंगूठा दे खुदा, करता भटकल रोष-

दिखा अंगूठा दे खुदा,  करता भटकल रोष |
ऊपर उँगली कर तभी, रहा खुदा को कोस |

रहा खुदा को कोस, उसे ही करे इशारा |
मारे कई हजार, कहाँ है स्वर्ग हमारा |

रविकर दिया जवाब, मिला जो जेल अनूठा |
यही तुम्हारा स्वर्ग, चिढ़ा तू दिखा अंगूठा ||  

कार्टून :- ख़तरे का खि‍लाड़ी नं0-1



रवताई राजा हुआ, ऐसा होता अर्थ |
ऐसा ही कुछ रवतरा, करता यहाँ अनर्थ |

करता यहाँ अनर्थ, नहीं छू लेना भाई |
देगा झटका मार, एक राजा की नाईं |

रविकर का आकलन, रवकना जान गंवाई |
बिजली होती फेल, किन्तु ना हो रवताई || 


लोकतंत्र की शक्ल में, दिखने लगी चुड़ैल |

परियों सा लेकर फिरे, पर मिजाज यह बैल |


पर मिजाज यह बैल, भेद हैं कितने सारे |

वंश भतीजा वाद, प्रान्त भाषा संहारे |


जाति धर्म को वोट, जीत षड्यंत्र मन्त्र की |

 अक्षम विषम निहार, परिस्थिति लोकतंत्र की |


कैसे मुद्रा-पस्त, नहीं घर में हैं दाने-

कैडर से डर डर करे, कैकेयी कै-दस्त |
कैटभ कैकव-अपर्हति, कैसे मुद्रा-पस्त |

कैसे मुद्रा-पस्त, नहीं घर में हैं दाने |
कोंछे में वंचिका, चली जा रही भुनाने |

आये नानी याद, चाल चल रही भयंकर |
दे गरीब के नाम, करे खुश लेकिन कैडर ||

 कैकव-अपर्हति=असली बात बहाने से छिपाना 


4 comments:

  1. वाह बहुत सुंदर !

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
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    आप अभी तक हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {साप्ताहिक चर्चामंच} की चर्चा हम-भी-जिद-के-पक्के-है -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा : अंक-002 मे शामिल नही हुए क्या.... कृपया पधारें, हम आपका सह्य दिल से स्वागत करता है। आपके विचार मेरे लिए "अमोल" होंगें | आगर आपको चर्चा पसंद आये तो इस साइट में शामिल हों कर आपना योगदान देना ना भूलें। सादर ....ललित चाहार

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