Follow by Email

Sunday, 14 July 2013

रविकर को अफ़सोस, कार से कुचला पिल्ला -


 (१)
चिल्ला किल्ला गाड़कर, किल्ली रोज घुमाय ।
सदा नए जुमले गढ़ें , प्रतिद्वंदी घबराय । 

प्रतिद्वंदी घबराय, ढूँढ़ता वही सहारा ।
बुर्के में छिप जाय, बचे नहिं कोई चारा । 

रविकर को अफ़सोस, कार से कुचला पिल्ला । 
जले रेल में लोग, मरे सब चिल्ला चिल्ला -

(२)
कारें चलती रोड पर, कुत्ता गया दबाय । 
बस में बस अफ़सोस ही, क्या है अन्य उपाय । 

क्या है अन्य उपाय, पाय क्षतिपूर्ति बराबर । 
चालक आगे जाय,टाल कर वहीँ कुअवसर । 

जान बूझ कर आप, नहीं ना कुत्ता मारें । 
मिला  यही अभिशाप,  चलें यूँ ही सर-कारें ॥



क्यों जी क्यों न कहें हिंदू राष्ट्रवादी

नकारात्मक ग्रोथ से, होवे बेडा गर्क ।
सकल घरेलू मस्तियाँ, इन्हें पड़े नहिं फर्क-
आम जिंदगी नर्क बनाए  ।
पर परिवर्तन नहीं सुहाए ॥

रोटी थाली की छीने, चाहे रोजी जाय ।
छद्म धर्म निरपेक्षता, मौला ना मन भाय -
फिर भी फिर सरकार बनाये ।
पर  परिवर्तन नहीं सुहाए ॥ 

पाक बांग्लादेश से, दुश्मन की घुसपैठ ।
सीमा में घुस चाइना, रहा रोज ही ऐंठ -
अन्दर वह सीमा सरकाए ।
पर  परिवर्तन नहीं सुहाए ॥ 
Neeraj Kumar 

मिला यही अभिशाप, चलें यूँ ही सर-कारें -


निकली अक्कल दाढ़ अब, झारखंड दरबार |
कार चलाना छोड़ कर, चला रहे |सरकार 

चला रहे सरकार, मरे ना कोई पिल्ला |
करे नक्सली वार,  सके ना पब्लिक चिल्ला |

कर ले बन्दर-बाँट, कसर पूरी कर पिछली |
अंधे हाथ बटेर,, लाटरी रविकर निकली ||


कारें चलती रोड पर, कुत्ता गया दबाय-

कारें चलती रोड पर, कुत्ता गया दबाय । 
बस में बस अफ़सोस ही, क्या है अन्य उपाय । 
क्या है अन्य उपाय, पाय क्षतिपूर्ति बराबर । 
चालक आगे जाय,टाल कर वहीँ कुअवसर । 
जान बूझ कर आप, नहीं ना कुत्ता मारें । 
मिला  यही अभिशाप,  चलें यूँ ही सर-कारें ॥ 

7 comments: