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Monday, 29 July 2013

दुर्गा पर भारी पड़े, शुतुरमुर्ग के अंड-




आज नहीं वह दंड, नोयडा खाण्डव-वन है-

Durga Shakti Nagpal, a young woman IAS officer of 2010 batch has been shifted from Punjab care to Uttar Pradesh cadre on the ground of marriage to  Shri Abhishek Singh, IAS officer of 2011 batch of Uttar Pradesh Cadre.

दुर्गा पर भारी पड़े, शुतुरमुर्ग के अंड |
भस्मासुर को दे सकी, आज नहीं वह दंड |

आज नहीं वह दंड, नोयडा खाण्डव-वन है  |
कौरव का उत्पात, हारते पाण्डव जन हैं |

फिर अंधे धृतराष्ट्र, दुशासन बेढब गुर्गा |
बदल पक्ष अखिलेश, हटाते आई एस दुर्गा-

“सरस्वती वन्दना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

सरस्वती वन्दना

माता के शुभ चरण छू, छू-मंतर हों कष्ट |
जिभ्या पर मिसरी घुले, भाव कथ्य सुस्पस्ट |



भाव कथ्य सुस्पस्ट, अष्ट-गुण अष्ट सिद्धियाँ |
पाप-कलुष हों नष्ट, ख़तम हो जाय भ्रांतियां |



काव्य
करे कल्याण, नहीं कविकुल भरमाता  |
हरदम होंय सहाय, शारदे जय जय माता ||

Untitled

Deepti Sharma 


त्रिज्याएँ त्रिजटा बने, हिम्मत पाए सीय |
बजरंगी नापें परिधि, होय मिलन अद्वितीय ||




 उल्लूक टाईम्स
ले दे के है इक शगल, टिप्पण का व्यापार |
इक के बदले दो मिले, रविकर के दरबार |
रविकर के दरबार, एक रूपये में मनभर |
काटे पांच रसीद, खाय बारह में बब्बर |
यहाँ बटें नि:शुल्क, नहीं ब्लॉगर को खेदे |
दे दे दे दे राम, नहीं तो ले ले ले दे ||


वोटों की दरकार, गरीबी वोट बैंक है-

लेकर कुलकर आयकर, करती क्या सरकार |
लोकतंत्र सुकरात का, वोटों की दरकार |

वोटों की दरकार, गरीबी वोट बैंक है | 
विविध भाँति सत्कार, तंत्र में फर्स्ट-रैंक है |

दे अनुदान तमाम, मुफ्त में राशन देकर |
करते अपना नाम, रुपैया हमसे लेकर ||

जीवन से कुल हास्य रस, जग ले जाए छीन-

अखरे नखरे खुरखुरे, जब संवेदनहीन  |
जीवन से कुल हास्य रस, जग ले जाए छीन |

जग ले जाए छीन, क्षीण जीवन की आशा |
बिना हास्य रोमांस, गले झट मनुज-बताशा |

खे तनाव बिन नाव, किनारा निश्चय लख रे |
लाँघे विषम बहाव, ज्वार-भांटा नहिं अखरे ||


5 comments:

  1. आज नहीं वह दंड, नोयडा खाण्डव-वन है |
    कौरव का उत्पात, हारते पाण्डव जन हैं |

    फिर अंधे धृतराष्ट्र, दुशासन बेढब गुर्गा |
    बदल पक्ष अखिलेश, हटाते आई एस दुर्गा-
    bahut sundar !

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  2. बहुत शानदार टिप्पणियाँ करते हो आप तो।
    आभार रविकर जी...!

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  3. दंड अगर देती तो दुर्गा माता नहीं कहाती
    तब तक सहती जबतक अति नहीं हो जाती |

    अंत तभी होता जब धरती रूप काली विकराली
    अत्याचारी से लडती हर नारी हिम्मतवाली |

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  4. बहुत बढिया टिप्पणियाँ..आभार

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  5. बहुत बढिया टिप्पणियाँ.

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