Follow by Email

Tuesday, 30 July 2013

राज्य नए मुख्तार, और भी कई बनाना-



pramod joshi 


गाना ढपली पर फ़िदा, सुने नहीं फ़रियाद |
पड़े मूल्य करना अदा, धिक् धिक् मत-उन्माद |
धिक् धिक् मत-उन्माद, रवैया तानाशाही |
चमचे देते दाद, करें दिन रात उगाही  |
 राज्य नए मुख्तार, और भी कई बनाना |
और उठे आवाज, बना जो तेलंगाना || 

ताऊ और रामप्यारी की हरकीरत ’हीर’ से दो और दो पांच.....


ताऊ रामपुरिया 


माला महकौवा मँगा, रखे चिकित्सक एक |
उत्सुकता वश पूछता, रोगी टेबुल टेक |


रोगी टेबुल टेक, महोदय हेतु बताना |
मेरा पहला केस, किन्तु तुम मत घबराना |


चीर-फाड़ जब सफल, गले में अपने डाला  | 
अगर बिगड़ता केस, डलेगी तुम पर माला ||
पी.सी.गोदियाल "परचेत" 
खोजो शाला इक बड़ी, पढ़ते जहाँ अमीर  |
मनचाहा साथी चुनो, सुन राँझे इक हीर |

सुन राँझे इक हीर, चीर कर दिखा कलेजा |
सुना घरेलू पीर, रोज खा उसका भेजा |

प्रथम पुरुष को पाय, लगाए दिल वह बाला |
समय गया पर बीत, पुत्र हित खोजो शाला ||
सृजन मंच ऑनलाइन  

चंचल मन का साधना, सचमुच गुरुतर कार्य |
गुरु तर-कीबें दें बता, करूँ निवेदन आर्य |


करूँ निवेदन आर्य, उतरता जाऊं गहरे |
दिखे प्रबल संघर्ष, नहीं नियमों के पहरे |


बाहर का उन्माद, बने अन्तर की हलचल |
दे लहरों को मात, तलहटी ज्यादा चंचल ||
पूरण खण्डेलवाल
 फलता है हर फैसला, फैला कारोबार |
अधिकारी का हौंसला, तोड़े बारम्बार |
तोड़े बारम्बार, शक्ति दुर्गा की तोड़े |
सच्चाई की हार, वोट कुछ दल ने जोड़े |
छलता सत्ता-असुर, सिंह रह गया उछलता |
हुवा फेल अखिलेश, छुपाता सतत विफलता | 
दुर्गा पर भारी पड़े, शुतुरमुर्ग के अंड |
भस्मासुर को दे सकी, आज नहीं वह दंड |

आज नहीं वह दंड, नोयडा खाण्डव-वन है  |
कौरव का उत्पात, हारते पाण्डव जन हैं |

फिर अंधे धृतराष्ट्र, दुशासन बेढब गुर्गा |
बदल पक्ष अखिलेश, हटाते आई एस दुर्गा-

कौन टाइप के हो समीर भाई


Girish Billore 


सदर सदारत जबर जबलपुर, लम्ब्रेटा की लम्बी चाल |
कुदरत का खुबसूरत टुकड़ा, देखा समझा बाल-बवाल |
खुश्बू वाला पान चबाये, होंठों को कर लेते लाल |
दीवारों पर नई कलाकृति, अब भी क्या देते हैं डाल --

कमल खिलेंगे बहुत पर, राहु-केतु हैं बंकु |
चौदह के चौपाल  की, है उम्मीद त्रिशंकु |

है उम्मीद त्रिशंकु, भानुमति खोल पिटारा |
करे रोज इफ्तार, धर्म-निरपेक्षी नारा |

ले "मकार" को साध, कुशासन फिर से देंगे |
कीचड़ तो तैयार, 
मगर क्या कमल खिलेंगे--
*Minority
*Muthuvel-Karunanidhi 
*Mulaayam
*Maayaa
*Mamta 

3 comments: