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Wednesday, 27 June 2012

एकाधिक से यौनकर्म, ड्रग करते इंजेक्ट --250 वीं पोस्ट : इस ब्लॉग की

जिद्दी सिलवटें

संगीता स्वरुप ( गीत )
सौ जी.बी. मेमोरियाँ, दस न होंय इरेज |
रोम-रैम में बाँट दे, कुछ ही कोरे पेज |

कुछ ही कोरे पेज, दाग कुछ अच्छे दीदी |
रखिये इन्हें सहेज, बढे इनसे उम्मीदी |

रविकर का यह ख्याल, किया जीवन में जैसा |
रखे साल दर साल, सही मेमोरी वैसा |

अच्छी नींद के लिए....

Kumar Radharaman
स्वास्थ्य

 बरसे धन-दौलत सकल, बचे नहीं घर ठौर |
नींद रूठ जाए विकल, हजम नहीं दो कौर |

हजम नहीं दो कौर, गौर करवाते भैया |
बड़े रोग का दौर, काम का नहीं रुपैया |

करिए नित व्यायाम, गर्म पानी से न्याहो |
मिले पूर्ण विश्राम, राधा-कृष्ण सराहो |। 

"अन्तरजाल हुआ है तन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री  उच्चारण  


यहीं मिले हैं चाचा ताऊ, दीदी बुआ बेटियां गुरुवर ।
भाई बेटा मित्र भतीजा, व्यवसायी गुरुभाई टीचर ।।
 
एडवोकेट मीडिया पर्सन, नौकर मालिक बैंकिंग अफसर ।
पब्लीशर एजेंट सिनेमा, तरह तरह के कई करेक्टर ।।
 हास्य 
मिला शेर को सवा शेर फिर, एक बहेलिया कई कबूतर ।
बड़े बाप हैं यहाँ कई तो, मिला नहीं पर सच्चा पुत्तर ।।




 आज अमरीका भर में नेशनल 

veerubhai 
एकाधिक से यौनकर्म, ड्रग करते इंजेक्ट  ।
बाई-सेक्सुयल मैन गे, करिए इन्हें सेलेक्ट । 

करिए इन्हें सेलेक्ट, जांच करवाओ इनकी ।
केस यही परफेक्ट, जान जोखिम में जिनकी ।

एच. आई. वी. प्लस,  जागरूक बनो नागरिक ।
वफादार हो मित्र , नहीं संगी  एकाधिक ।

सदा 
रूप निखारे वित्त-पति, रुपिया हो कमजोर ।
नोट धरे चेहरे हरे, करें चोर न शोर ।

करें चोर न शोर, रखे डालर में सारे ।
हम गंवार पशु ढोर, लगाएं बेशक नारे ।

है डालर मजबूत, इलेक्शन राष्ट्र-पती का  ।
इन्तजार कर मीत, अभी तो परम-गती का । 

dheerendra 

स्वागत करता मित्रवर, शुभकामना प्रसाद |
काव्यांजलि पर धीर को, देता रविकर दाद |

देता रविकर दाद, मुबारक हों फालोवर |
मिले सफलता स्वाद, सदा ही बम-बम हरिहर |

रचनाएँ उत्कृष्ट, बढ़ें नित नव अभ्यागत |
बढ़ते जाएँ पृष्ट, मित्रवर स्वागत स्वागत ||

संतोष त्रिवेदी
बैसवारी baiswari

हुवे कबूतर क्रूर सब, करें साथ मतदान ।
जब्त जमानत हो रही, बहेलिया हैरान । 

कौवों ने रंगवा लिया, सब सफ़ेद सा पेंट ।
असमंजस में कोयली, गाड़ी खुद का टेंट ।


जबरदस्त यह शायरी, तेज धार सरकार ।
सावधान रहिये जरा, करवाएगी मार । 
  1. करवाएगी मार अगर पढ़ लेगी बीबी,
    भूखा रहना पडेगा,हो जायेगी टी०वी०
    खुश रक्खो, दिलवाओ झुमके बाली.
    तभी बनोगे तुलसी और वो रत्नावली,,,,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: बहुत बहुत आभार ,,
  2. सहने की आदत पड़ी, साल हुवे अब तीस |
    नीले नीले हैं निशाँ, उठे नहीं पर टीस |
    उठे नहीं पर टीस, दूसरे तुलसी लागैं |
    रचनाएं सब बीस, वीक में सीधे भागैं |
    शनी और इतवार, बड़ी होती है खातिर |
    रत्ना खातिर गिफ्ट, किन्तु रत्ना तो शातिर ||

चर्चा - 924

दिलबाग विर्क 

सुन्दर चर्चा साजते, लगते रोचक लिंक |
हरियाली बरसात की, नीले पीले पिंक ||

सिल्वर जुबिली समारोह -1987 की मार्मिक यादें

G.N.SHAW
BALAJI  

दो साथी को नमन कर, दो मिनटों का मौन |
चौंतिस साथी जम गए, मिला रेलवे भौन |

मिला रेलवे भौन, मटन सांभर आर्केस्ट्रा |
धरना भी हो गया, पार्टी होती एक्स्ट्रा |

बीता लंबा काल, बहुत कुछ खोया पाया |
चलती रोटी दाल, एक परिवार बनाया || 

चर्चामंच अनोखा मंच

अरुन शर्मा 
 दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की )
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आसानी से कह रहे, अरुण तरुण एहसास ।
ब्लॉग-जगत का कर रहा, चर्चा-मंच विकास ।


चर्चा-मंच विकास , आस है भारी इससे ।
छपते गीत सुलेख, विवेचन  गजलें  किस्से ।


बहुत बहुत आभार, प्यार से इसे नवाजा ।
कमी दिखे तत्काल, ध्यान शर्तिया दिला जा ।।

कौवे की तरह कावँ-२ करते हैं

अरुन शर्मा
दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की )
 

खेले नेता गाँव में, धूप छाँव का खेल |
बैजू कद्दू भेजता, तेली पेट्रोल तेल |
बैंगन लुढ़क गया ||


परती की धरती पड़ी, अपना नाम चढ़ाय |
बेचे कोटेदार को, लाखों टका कमाय |
बैजू भड़क गया ||

    .



10 comments:

  1. बहुत सुन्दर कुण्डलियाँ रचते हैं आप!

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  2. वाह ... बहुत ही बढिया प्रस्‍तुति ... आभार

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  3. बहुत ही बढिया

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  4. रविकर जी ने दे दिया प्यार भरा प्रसाद |
    धीर अधीर हो गया,मिली जो उनकी दाद ||

    मिली जो उनकी दाद,मै सपनों में खो गया |
    जैसे किसी अनचाहे को भगवान मिल गया ||

    एक साल लिखते हुआ,काव्यान्जली में पोस्ट |
    मुश्किल से मिलता कभी रविकर जैसा दोस्त ||

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  5. बहुत अच्छी प्रस्तुति!

    इस प्रविष्टी की चर्चा शुक्रवारीय के चर्चा मंच पर भी होगी!

    सूचनार्थ!

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  6. रूप निखारे वित्त-पति, रुपिया हो कमजोर ।
    नोट धरे चेहरे हरे, करें चोर न शोर ।

    भाई साहब रविकर जी दिनेश की दिल्लगी गुणवत्ता में ,मात्रात्मक्ता में लंबा सफर तय कर रही है .बधाई स्वीकार करें .एच आई वी परीक्षण दिवस पर आपकी सारगर्भित पंक्तियाँ पोस्ट के आमुख पर ध्यान खींच रहीं हैं राम राम भाई पर भी .शुक्रिया इस पोस्ट संश्लेषण के लिए .

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  7. हमेशा की तरह आपकी दिल्लगी मनभावन है।

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  8. दिल नहीं है हवाई जहाज है
    ये दिल्ल्गी के सरताज हैं ।

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  9. दिल्लगी यह दिल को लग गयी

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