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Monday, 11 June 2012

आज तलक अवकाश रहा-

लौटा बुद्धू घर को आया, लम्बा बहुत प्रवास रहा |
स्नेह-सिक्त पवनों के झोंके, अभिनव बेहद ख़ास रहा |

सुबह सुबह आकर बैठा हूँ, भीषण गर्मी अकुलाये -
कल से नियमित फिर आऊँगा, आज तलक अवकाश रहा ||

चिरकुट-चूहों से बचाओ !

संतोष त्रिवेदी
चिरकुट चूहों की हरकत पर, "चाची"  का *चूँचरा सुना ।
*बहाना/ विरोध 
आज तलक क्या सफ़ेद हाथी, गन्ना खाकर मरा सुना ??

आज अन्न पर प्रेक्टिस करते, कल अन्ना को धरा सुना ।
  
जनता से सत्ता ना डरती, ज्ञापन से क्या डरा सुना ?? 




10 comments:

  1. आओ स्वागत वीर बहादुर,तलवार उठा लो फिर से,
    घूम-घाम के सब जग देखा,मगन रहो अब फिर से !!

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  2. बेहतरीन अभिव्यक्ति, सुंदर रचना,,,,, ,

    MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: ब्याह रचाने के लिये,,,,,

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  3. बहुत सुन्दर...

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  4. बढ़िया पोस्ट है .लौट के आये रविकर जी ,फिर से छाये रविकर जी ,

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  5. बहुत बढिया।

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  6. आपका अंदाज़ लाजवाब है ... पारुल और अंशुल कों बधाई ...

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  7. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |

    पैदल ही आ जाइए, महंगा है पेट्रोल ||

    --

    बुधवारीय चर्चा मंच

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  8. मित्रों चर्चा मंच के, देखो पन्ने खोल |

    पैदल ही आ जाइए, महंगा है पेट्रोल ||

    --

    बुधवारीय चर्चा मंच

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  9. बढ़िया सूत्र...
    सादर

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