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Thursday, 19 April 2012

आदिकाल से वास, यहाँ पर लोग करे हैं -

कोरबा


पढता जाऊं कोरबा, कौरव पांडू जाति ।
ऐतिहासिक यह क्षेत्र है, बढ़ी हमेशा ख्याति । 

बढ़ी हमेशा  ख्याति, खनिज भण्डार भरे हैं ।
आदिकाल से वास, यहाँ पर लोग  करे हैं ।

सिंहावलोकन करत,  ध्यान से आगे बढ़ता ।
बौद्ध तथा गोदान, श्रेष्ठ रामायण पढता ।।
  शब्द निवेदन में यही, यही शब्द सन्देश |
कविता हो जाते अगर, बढ़ता भावावेश |

बढ़ता भावावेश, माध्यम अच्छा पाया ।
बसे दूर परदेश, पिया के पास पठाया । 

सुरभित सुमन सुगंध, संग में कंटक भेदन ।
शब्द भाव बिन व्यर्थ, बांचिये शब्द निवेदन ।।


केक  और  मिष्ठान  खिलाओ  |
सखी सहेली मित्र बुलाओ |
जन्म दिवस की मंगल बेला-
दीप जला कर ख़ुशी मनाओ |
हैप्पी-बर्थ  डे हैप्पी हैप्पी -
जोर-शोर से गगन गुन्जाओ |
नियमित ब्लोगिंग करते जाओ 
रुनझुन चुन चुन गुनगुन गाओ | 

"नमस्ते हैलो हाय"

  उल्लूक टाईम्स
तब तो परीक्षा केंद्र को ही दीजिये बधाई |
कम से कम एक बार मुलाक़ात कराई |
हम बेकार बेकरार हैं |
आप स्कूटी हैं कार हैं |
उल्लूक टाइम्स पर कैसे पेट्रोल भराई ??


यादों का आईना

  शब्दों का उजाला

सदा हृदय में बारती, यादों का हरदीप ।
हर सुख दुःख में एकसा, मिलते पिता समीप ।।


6 comments:

  1. सुरभित सुमन सुगंध, संग में कंटक भेदन ।
    शब्द भाव बिन व्यर्थ, बांचिये शब्द निवेदन ।।

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

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  2. bahut sundar dohe hamesha ki tarah.

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  3. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  4. कहाँ कहाँ उल्लू को उड़ायेंगे
    भाई लोग परेशान हो जायेंगे
    हर शाख पै तो बैठाया ही गया है
    हर ब्लाग पर भी क्या बैठायेंगे ?

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