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Sunday, 22 April 2012

मुखड़े पर मुस्कान, जनाजा निकले धांसू -

समय के साथ


ज़िंदा  है  माँ  जानता, इसका मिला सुबूत ।
आज पौत्र को पालती, पहले पाली पूत ।

पहले पाली पूत, हड्डियां घिसती जाएँ ।
करे काम निष्काम, जगत की सारी माएं ।

 किन्तु अनोखेलाल, कभी तो हो शर्मिन्दा ।
दे दे कुछ आराम, मान कर मैया ज़िंदा ।।  

अंतिम इच्छा

  आवारा बादल -


वाह वाह बस वाह है, नहीं आह का काम ।
सीधी साधी चाह है, निश्चित जब अंजाम ।

 निश्चित जब अंजाम, तयारी पूरी कर लूँ ।
छपा रखे है कार्ड, सही से तिथि को भर लूँ ।

पक्का न्यौता मान, मगर निकले न आंसू ।
मुखड़े पर मुस्कान, जनाजा निकले धांसू ।।

पृथ्वी दिवस पर.......



पेड़ कटे तालाब पटे,
अब जंगल से सटते जाते |
कंक्रीट की दीवारों में,
पल पल हम पटते जाते |

आबादी का बोझ नही जब,
सह पाती छोटी सड़कें -
कुर्बानी पेड़ों की होती
बार बार कटते जाते ||



मुज़रिम


चित्र मार्मिक खींच गया कवि  मांगों पर अब  मौत मिले |
नीति नियत का नया नियंता, भिखमंगो से बड़े गिले | 



मांगे मांगे मांग रहा है, मांगों का लो अंत किया-
दर्द ख़तम सब स्वांग ख़तम, जा रे ले जा मौत दिया ||

सुर्ख लबों पर कड़वी बातें


धोबी माली ठेले-वाला, ड्राइवर हाकर मेले-वाला 
मिश्री-डली घोल के रखती, जैसे हो पहचान पुरानी ।

रंग-रूप यौवन है धोखा, चलते चलते ढल जाएगा-
कडुवाहट से कान पके मम, प्रिये बोल अब मीठी बानी ।।

पेड़ बनाम आदमी


भाव सार्थक गीत के, आवश्यक सन्देश ।
खुद को सीमित मत करो, चिंतामय परिवेश ।

चिंतामय परिवेश, खोल ले मन की खिड़की ।
जो थोड़ा सा शेष,  सुनो उसकी यह झिड़की ।

उत्साही राजेश, साधिये हित जो व्यापक ।
बगिया वृक्ष सहेज, तभी ये भाव सार्थक ।।

8 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर टिप्पणियाँ ,....

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...:गजल...

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  2. आप तो कविता फैक्टरी हैं।
    और कमाल है कि पोस्ट लगी नहीम आपकी कविराई टिप्पणी हाज़िर।

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  3. वाह...
    किन्तु अनोखेलाल, कभी तो हो शर्मिन्दा ।
    दे दे कुछ आराम, अगर है मैया ज़िंदा ।।

    बढ़िया टिप्पणियों से सजे लिंक्स.....

    सादर.

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  4. माँ जैसा कोई नहीं ,दाता इस संसार में,
    भले दूर वह रहे मगर हमें असीसे प्यार से !!

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  5. बहुत बढि़या।

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