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Friday, 14 September 2012

मौत कुआँ मशहूर, कभी न डाकू चूका-


काशी का निरालापन

रणधीर सिंह सुमन 


 बना बनारस रहेगा, विश्वनाथ का धाम ।
सुबह बनारस की भली, भली अवध की शाम ।

भली अवध की शाम , दफ़न आशिक माशूका ।
मौत कुआँ मशहूर, कभी न डाकू चूका ।

शिक्षा नगरी श्रेष्ठ, मुहल्ला खोजा खाली ।
दिल्ली करें प्रवास, मनाते वहीँ दिवाली ।। 


हिन्दी भाषा

Maheshwari kaneri  


जय जय हिंदी लिख गई, माँ चरणों में बैठ ।
सुलगे चूल्हा, कोयला, बेढब ली'डर ऐंठ ।

बेढब ली'डर ऐंठ, नहीं गाई मंहगाई ।
जल डीजल जलजला, सिलिंडर आग लगाईं ।

कार्टून की गूँज, आस्था की हो चिंदी ।
नहीं कहूँ कुछ और, जोर से जय जय हिंदी ।।


"कौन है जरूरी..प्यार या दोस्ती? सवाल खुद से और आप सबसे"

कुछ शाश्वत सम्बन्ध हैं, परे दोस्ती प्यार ।
स्वार्थ सिद्ध के योग की, करे प्यार मनुहार ।

करे प्यार मनुहार, स्वयं की ख़ुशी मूल है ।
 जाता देना भूल, करेगा पर क़ुबूल है ।

किन्तु दोस्ती भाव, परस्पर सुख दुःख देखे ।
सदा प्यार से श्रेष्ठ, दोस्ती मेरे लेखे ।।

लेटर टू अ बेस्ट फ्रेंड

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur)
सिस्टर इंग्लिश डोंट पुश, टू मच रस, एड्जस्ट ।
ब्राउन पीपुल लाइकिंग, यू स्टैंडिंग फस्ट । 
यू स्टैंडिंग फस्ट, बट यू नो परडेसी ।
फ्लाई  नो स्काई , हेट करते हैं बेसी ।
पैक युअर बेड-रोल,  टाइम हैज कम माई डीयर ।
बोलें हिंदी बोल, अर्थ से जुडती रविकर ।।


हिंसा-प्रतिहिंसा से संतोषप्रद निर्णायक समाधान असंभव है।


चरम शब्द से प्रगटते, साधारण सा भाव ।
चरम दशा का किस तरह, होवे भाव अघाव ।

होवे भाव अघाव, घाव छोटे को  दारुण ।
करे महज कर्तव्य, दिखावा बडका कारूण ।

होय जरा सी बात, हटक तिल ताड़ बनाते ।
सहनशीलता ख़तम, फटाफट आग लगाते ।।


जिंदगी की तरह ...

सदा 


अपनी ये जो जिंदगी, लगे पुस्तकाकार ।
सदा बांटती ज्ञान तुम, बहुत बहुत आभार ।

बहुत बहुत आभार, पेज संख्या तारीखें ।
मातु पिता गुरु श्रेष्ठ, आवरण उम्दा दीखे ।

कुछ पन्ने मुड़ जाँय, कहीं पानी पड़ जाये ।
रखिये सदा संभाल, कभी सड़ने न पाये ।।
  

4 comments:

  1. मेरी रचना को मान देने के लिए आभार..

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  2. हिन्दीदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (15-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. विचारोँ पर सुन्दर प्रतिक्रियात्मक उल्लेख के लिए आभार्

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