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Monday, 17 September 2012

प्रश्नों का अब क्या कहें, खड़े होंय मुंह बाय-




फिर मिलने का...

dheerendra  


अजब गजब अंदाज है, बात करें चुपचाप ।
इक जगह पर हों खड़े, खुद की सुन पदचाप ।
 खुद की सुन पदचाप, गजब दीवानापन है ।
बारिश में ले भीग, प्रेम रस का आसन है ।
फिर मिलने की बात, आज मत करना भाई ।
सही जाय न आज, कहीं से यह रुसवाई ।।
  

पक्का !!... ये भूल जायेगा !!


लौह कील तलुवे घुसी, सन अस्सी की बात ।
चीखा चिल्लाया बहुत, सच में पूरी रात ।
सच में पूरी रात, सुबह टेटनेस का टीका ।
डाक्टर दिया लगाय, किन्तु अटपटा सलीका ।
नया दर्द यह घोर, पुराना दर्द भुलाता ।
वाह वाह कोयला,  तुम्हारी महिमा गाता ।।




हतप्रभ महिलायें खड़ी, ताके पूरा *औध ।
चूड़ी पायल हैं नहीं, बिन बाली की पौध ।
बिन बाली की पौध, नहीं कुम्हलाने पावे ।
जो भी जिम्मेदार, मदरसा इसे पठावे ।
करे 'मदर' सा प्यार, नहीं दिल और दुखाएं ।
बढ़ा मदद को हाथ, अरी  हतप्रभ महिलायें  ।।
*अवध, सीतापुर 

कितने पीसी *टेबलेट, बंटवाएँ अखिलेश ।
किन्तु आयरन की कमी, टेबलेट नि:शेष ।
*टेबलेट नि:शेष, देख बिटिया मरियल सी ।

हो जाए आपूर्ति, विटामिन सह मिनरल की ।
पाए ताकत *ढेर, कहीं लागे न मिटने ।  
*ढेर लगाई पांच, अभी लगने हैं कितने ।।
यमक 
*बहुत / एक स्थान पर इकठ्ठा करना

अब कब जाओगे ????

उत्तर मिलता है कभी, कभी अलाय बलाय ।
प्रश्नों का अब क्या कहें, खड़े होंय मुंह बाय ।
खड़े होंय मुंह बाय, नहीं मन मोहन प्यारे ।
सब प्रश्नों पर मौन, चलें वैशाखी धारे ।
वैशाखी की धूम, लुत्फ़ लेता है रविकर ।
यूँ न प्रश्न उछाल, समय पर मिलते उत्तर ।।

2 comments:




  1. फिर मिलने का....

    बाद मुद्दत के मिले हो
    चलो कुछ दूर चले(चलें )
    खामोश रहे(रहें ) और बात करे(करें )
    एहसासात को जिए(जिएँ )
    लम्हों को थामें
    आँसू की बूँदें
    आँखों में बांधें
    कुछ पल ठहरें
    दरख्तों के नीचे
    चुपचाप निहारें
    दर्द सवारें
    फिर बारिश में भीगें
    होठों से कोई
    शिकवा शिकायत न करे(करें )
    रुसवाई की भी
    कोई चर्चा न करें
    आओ फिर मिलने का
    वायदा करें,...


    ये मौसम है प्यार का ,
    यूं वक्त जाया न करें ,

    बाद मुद्दत के मिलें हैं ,
    इसका क्या शिकवा करें ,
    कब मिलेंगे फिर से ,
    आओ मिल दुआ करें .
    बढिया प्रस्तुति है .....

    बाद मुद्दत के मिले और इस तरह देखा इधर ,
    जिस तरह एक अजनबी पर अजनबी डाले नजर .
    रूठ कर जाते जिधर !
    प्यार के मौसम सभी आते उधर

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