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Wednesday, 19 September 2012

कवि "कुश" जाते जाग, पुत्र रविकर के प्यारे -



आज के व्यंजन

kush  

सोते कवि को दे जगा, गैस सिलिंडर आज ।
असम जला, बादल फटा, गरजा बरसा राज ।
गरजा बरसा राज, फैसला पर सरकारी ।
मार पेट पर लात, करे हम से गद्दारी ।
कवि "कुश" जाते जाग, पुत्र रविकर के प्यारे ।
ईश्वर बिन अब कौन,  यहाँ हालात सुधारे ।।


मौका बढ़िया ताड़ के, नेहरु लेते साध |
नेता जी से हो गया, शुद्ध युद्ध अपराध |
शुद्ध युद्ध अपराध, भेज कर चिट्ठा बरसे |
सहा सोवियत रूस, सभी गोरे थे हरसे |
बना ब्रिटिश अभिलेख, आज रविकर नहिं चौका |
नेहरु का कश्मीर, गालियों का है मौका ||


अस्पताल को ^लेट, ^लेट हो जाता तेजा-

तेजा की बाइक चले, बिन  'हेलमेट'  के तेज ।
मीलों ऑफिस बाप का, आता झट से भेज ।
आता झट से भेज,  जाय हरदिन चौराहे ।
 बाहर *भेजा बाप, ^लेट ना होना चाहे ।
बाइक जाती फिसल, निकलता बाहर *भेजा ।
अस्पताल को ^लेट,  ^लेट हो जाता तेजा ।।

महाराष्ट्र का राज, राष्ट्र का बनके दुश्मन-

मोहन हन हन हूरता, राजदार हम-राज ।
ऍफ़ डी आई को दिया, आने की आवाज ।
आने की आवाज, कमीशन सोलह आने ।
उत्तर वाले घुसे, वही सारे मरवाने ।
महाराष्ट्र का राज, राष्ट्र का बनके दुश्मन।
रहा कुल्हाड़ी मार, पैर में राजौ-मोहन ।

कुछ आंसू घडियाली से

 डाली दुनिया पर नजर, होती जलकर कोल |
खाली गाली दे रहे, खोल सके ना पोल |
खोल सके ना पोल, दुश्मनी करें प्यार से |
ममता को एहसास, बने नहिं काम रार से |
रहा भरोसा डोल, चाल यह देखी भाली |
बढ़ा मुलायम रोल, नजर माया ने डाली ||


सम्बंधित पोस्ट पर टिप्पणी नहीं की गई -
कई अर्थ का अनर्थ न हो जाये -

 कोखों-गोदों को लजा, मजा ले रहे दुष्ट ।
इनको देनी क्या सजा, भोगेंगे खुद कुष्ट ।

 भोगेंगे खुद कुष्ट, रुष्ट बुद्धि हो जाये ।
होते नहिं संतुष्ट, सगी माँ को गरियाए ।

लिंग-भेद का पाप, नहीं फल देता चोखो ।
 करिए अब इनकार, पाल मत दानव कोखों ।।

 

4 comments:

  1. श्रेष्ठ ब्लॉग लिंकों के संग्रह ' लिंक - लिक्खाड़ ' में मेरे ब्लॉग को स्थान देने के लिए आदरणीय श्री रविकर फैजाबादी जी का हार्दिक आभार ।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    गणेशचतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  3. कुछ आंसू घडियाली से

    डाली दुनिया पर नजर, होती जलकर कोल |
    खाली गाली दे रहे, खोल सके ना पोल |
    खोल सके ना पोल, दुश्मनी करें प्यार से |
    ममता को एहसास, बने नहिं काम रार से |
    रहा भरोसा डोल, चाल यह देखी भाली |
    बाधा मुलायम रोल, नजर माया ने डाली ||

    बहुत खूब भाईसाहब .जीते रहो .आबाद रहो .

    ram ram bhai
    बृहस्पतिवार, 20 सितम्बर 2012
    माँ के गर्भाशय का बेटियों में सफल प्रत्यारोपण

    ReplyDelete