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Monday, 18 March 2013

गुरु-वाइन का रंग, फिरे हैं भागे भागे-


रविकर शिव-सत्संग, मगन-मन सुने इंगला -कुम्भ-महिमा

 इड़ा पिंगला संग मे, मिले सुषुम्ना देह । 
 बरस त्रिवेणी में रही, सुधा समाहित मेह ।
सुधा समाहित मेह, गरुण से कुम्भ छलकता ।
संगम दे सद्ज्ञान , बुद्धि में भरे प्रखरता 
रविकर शिव-सत्संग, मगन-मन सुने इंगला ।
कर नहान तप दान, मिले वर इड़ा-पिंगला

इंगला=पृथ्वी / पार्वती / स्वर्ग 

  इड़ा-पिंगला=सरस्वती-लक्ष्मी (विद्या-धन )
किडनी डी एम के गई, वेंटीलेटर पार । 
इन्ज्वायिंग मेजोरिटी, बोल गई सरकार । 
 
बोल गई सरकार, बहुत आनंद मनाया । 
त्राहि त्राहि इंसान,  देखना भैया भाया । 
 
सत्ता का आनंद, हाथ की खुजली मिटनी । 
हाथी सैकिल बैठ, लूट लाएगा किडनी । 


वाह वाह ताऊ क्या लात है? में श्री अरविंद मिश्र

ताऊ रामपुरिया 


गुरुवर श्री अरविन्द जी, जिनका धाकड़ ब्लॉग |
वीणा-वादन ब्लॉग पर, साधे ताऊ-राग |
 
साधे ताऊ-राग, फाग में जागे जागे |
गुरु-वाइन का रंग, फिरे हैं भागे भागे |
 
ये ही तो सरकार, ट्रांसफर फर फर रविकर |
विश्वनाथ का नगर, छोड़ के जाते गुरुवर ||


pramod joshi 
इच्छाधारी सर्प हैं, हटे दृश्य वीभत्स |
नाग नाथ को नाथ ले, साँप नाथ का वत्स |

साँप नाथ का वत्स, अघासुर पड़ा अघाया |
हुई मुलायम देह, बहुत भटकाई माया |

मनुज वेश में आय, वोट की मांगे भिक्षा |
सुगढ़ सलोनी देह, वोट देने की इच्छा ||

हकीकत : दिल्ली से भीख मांगते रहे नीतीश !


महेन्द्र श्रीवास्तव 

पटना पटनायक सरिस, नीति चुने नीतीश |
चालाकी में भैंस से, पड़ते हैं इक्कीस |
पड़ते हैं इक्कीस, सदी इक्कीस भुनाते |
ले विशेष अधिकार, ख़्वाब ये हमें दिखाते |
रविकर से है रीस, उधर चालू है सटना |
दो नावों पर पैर, बड़ा मुश्किल है पटना ||




 भूली-बिसरी यादें
लाई-गुड़ देती बटा, मुँह में लगी हराम |
रेवड़ियाँ कुछ पा गए, भूल गए हरिनाम |


भूल गए हरिनाम, इसी में सारा कौसल |
बिन बोये लें काट, चला मत खेतों में हल |


बने निकम्मे लोग, चले हैं कोस अढ़ाई |
गए कई युग बीत, हुई पर कहाँ भलाई  ??



किसे चुने हत्यारो और लुटेरों में ?



tarun_kt 


यारा हत्यारा चुनो, बड़े लुटेरे दुष्ट |
टेरे माया को सदा, करें बैंक संपुष्ट |


करें बैंक संपुष्ट, बना देते भिखमंगा |
मर मर जीना व्यर्थ,  नाचता डाकू नंगा |


हत्यारा है यार, ख़याल रख रहा हमारा |
वह मारे इक बार, रोज मत मरना यारा ||

7 comments:

  1. बेहतरीन लिंक्‍स संयोजन ... आभार

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  2. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति आदरणीय,सादर नमन.

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  3. रोचक प्रस्तुति ...रोचक लिंक्स...

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  4. बहुत बढ़िया प्रस्तुति महोदय ,
    सभी लिनक्स एक दूसरे से बढकर..............
    साभार.......

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  5. क्या बात है ?बहुत खूब कही है जो भी कही है .काव्यात्मक व्यंग्य विनोद तंज शगल सभी इक साथ बहु -आयामी फाग कुंडलियाँ .

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  6. लगता है कुंडलिया आज तक की तरह अपडेट होती रहती हैं ताजी ताजी

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  7. आपको तो टिप्पणीश्री की उपाधि से विभूषित करना पड़ेगा मित्र!

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