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Sunday, 10 March 2013

शायद पहली मौत, देश में इतनी चर्चा-




महेन्द्र श्रीवास्तव 
शोकाकुल परिवार से गहरी सहानुभूति-
किन्तु क्या-

हो सकता है क्या नहीं, हों रिश्ते असहाय |
खर्चा पूरा नहिं पड़े, नाम लिस्ट में आय |

नाम लिस्ट में आय, सभी का हक़ पर हक़ है -
जीजा देवर बहन, खफा इन से नाहक है | 

शायद पहली मौत, देश में इतनी चर्चा |
उठा रही सरकार, सभी नातों का खर्चा || 

हक़ का हक़ है-
हक़ बेशक  मिले-
नाहक
लिस्ट लम्बी हो गई है-
सादर-

कुण्डलिया : नरेन्द्र मोदी की तरफ से-

हमने भी की गलतियाँ, मिले शर्तिया दंड |
शिकायतें भी हैं कई, किन्तु नहीं उद्दंड |

किन्तु नहीं उद्दंड, सिपाही भारत माँ का |
सेवा करूँ अखंड, करे ना कोई फांका |

सभी हाथ को काम, ग्रोथ नहिं देंगे कमने | 
स्वास्थ्य सुरक्षा शान्ति, शपथ दुहराई हमने ||

औरतें अपने जैसी औरतों को अपना हमदर्द क्यों न बना सकीं ?


Dr. Ayaz Ahmad 


हैरत होती है हमें, करते कडुवी बात |
खरी खरी लिख मारते, भूलो रिश्ते नात |

भूलो रिश्ते नात, सज्जनों को उपदेशा |
लेकिन दुर्जन दुष्ट, करे हैं खोटा पेशा |

गिरेबान में झाँक, सकें ना भोली औरत |
लागू है ड्रेस कोड, उन्हीं पर होती हैरत ||

 भूली-बिसरी यादें
जाला काटे हौसला, अब हिम्मत मत हार |
कर के दृढ़ संकल्प तू, ले जिंदगी सुधार ||



"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29

दोहे


रंग रँगीला दे जमा, रँगरसया रंगरूट |
रंग-महल रँगरेलियाँ, *फगुहारा ले लूट ||
*फगुआ गाने वाला पुरुष -


फ़गुआना फब फब्तियां, फन फ़नकार फनिंद |
रंग भंग भी ढंग से, नाचे गाये हिन्द ||

हुई लाल -पीली सखी, पी ली मीठी भांग |
  अँगिया रँगिया रँग गया, रंगत में अंगांग ||


देख पनीले दृश्य को, छुपे शिशिर हेमंत ।
आँख गुलाबी दिख रही, पी ले तनि श्रीमंत ॥

तड़पत तनु तनि तरबतर, तरुनाई तति तर्क ।
लाल नैन बिन सैन के, अंग नोचते *कर्क ॥
*केकड़ा

अंग अनेकन अर्थ भरे लुकवावत हैं रँगवावत हैं-




"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - 29


मदिरा सवैया 
नंग-धडंग अनंग-रती *अकलांत अनंद मनावत हैं ।
रंग बसंत अनंत चढ़ा शर चाप चढ़ाय चलावत हैं ।  
लाल हरा हुइ जाय धरा नभ नील सफ़ेद दिखावत हैं ।
अंग अनेकन अर्थ भरे लुकवावत हैं रँगवावत  हैं ॥
*ग्लानि-रहित


कार्टून कुछ बोलता है - एक उभरते उम्मीदवार का अंत !


पी.सी.गोदियाल "परचेत" 

कई दरिन्दे शेष है, मरते हैं मर जाँय |
मारे मारे शर्म के, कुल मारे लटकाय ||

11 comments:

  1. आदरणीय गुरुदेव श्री सादर प्रणाम बेहद सुन्दर एवं प्रभावशाली प्रस्तुति हार्दिक बधाई

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  2. बहुत ही सुन्दर एवं सार्थक प्रस्तुतिकरण,सादर नमन.

    गुरु आशीष से ईश मिले ,गुरु हाथो तपिश
    जप तप करते नहीं मिले ,सद्गुरु है जगदीश

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  3. हो सकता है क्या नहीं, हों रिश्ते असहाय |
    खर्चा पूरा नहिं पड़े, नाम लिस्ट में आय |

    नाम लिस्ट में आय, सभी का हक़ पर हक़ है -
    जीजा देवर बहन, खफा इन से नाहक है |

    शायद पहली मौत, देश में इतनी चर्चा |
    उठा रही सरकार, सभी नातों का खर्चा ||
    हक़ का हक़ है-
    हर्जाना देना आसान लोक लुभाऊ काम है .क़ानून व्यवस्था लागू करने की कोई बात नहीं करता ,

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  4. एक बेहया बदलाव के साक्षी बन रहे हैं हम लोग .

    ज़बर्ज़स्त तंज भाई साहब .व्यवस्था को राजा भैया ही हांक रहे हैं .

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  5. रंग रँगीला दे जमा, रँगरसया रंगरूट |
    रंग-महल रँगरेलियाँ, *फगुहारा ले लूट ||
    *फगुआ गाने वाला पुरुष -


    फ़गुआना फब फब्तियां, फन फ़नकार फनिंद |
    रंग भंग भी ढंग से, नाचे गाये हिन्द ||

    हुई लाल -पीली सखी, पी ली मीठी भांग |
    अँगिया रँगिया रँग गया, रंगत में अंगांग ||

    देख पनीले दृश्य को, छुपे शिशिर हेमंत ।
    आँख गुलाबी दिख रही, पी ले तनि श्रीमंत ॥

    तड़पत तनु तनि तरबतर, तरुनाई तति तर्क ।
    लाल नैन बिन सैन के, अंग नोचते *कर्क ॥

    खुमारी के रंग ऐसे ही होते हैं भैया साहब

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  6. खुमारी के रंग ऐसे ही होते हैं भैया साहब

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  7. बहुत बेहतरीन प्रस्तुति महोदय ,
    वर्तमान परिप्रेक्ष्य को रेखांकित
    करती ,बढ़िया.........

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  8. बहुत बढ़िया लिंक्स चयन हुज़ूर | सादर

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  9. 'अलगावों'के लिये है,सुदृढ़ सुदृढ़ बाड़ |
    प्रेम की फुलवारी बना, मीत 'लिंक-लिक्खाड़ ||

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  10. अलगावों के लिये है, मानो सुदृढ़ बाड़ |
    प्रीति-संकलन कर रहा, मीत लिंक लिक्खाड़ !!

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