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Friday, 1 March 2013

जजिया कर फिर जिया, जियाये बजट हालिया-


संजीव शर्मा 

कहें यात्रा को यहाँ, महायात्रा लोग |
महाचंड चैनल महा, महागुनी सहयोग |

महागुनी सहयोग, महादेवी महदाशा |
महादेव का भोग, पाय के चाट बताशा |

मरें जहाँ पर लोग, जमा हों माहापात्रा |
मकु रहस्य रोमांच, मीडिया महायात्रा ||

  महायात्रा=मृत्यु
महदाशा=ऊंची आकांक्षा
महादेव का भोग=भांग
माहापात्रा=कट्टहा ब्राह्मण जो मृतक कर्म का दान लेता है -


लो जी आ गया बजट अब तो खुश हो जाइए !!

पूरण खण्डेलवाल 

ख़्वाब दिखाये मीडिया , सत्ता कर दे चूर |
उच्च झाड़ पर चढ़ा के, झटका दे भरपूर |
झटका दे भरपूर, मरे मनहूस मीडिया |
मंहगाई दे मार, टैक्स में छूट ना दिया |
खुद के पूरे ऐश, कमीशन भर भर खाए |
रहा हमें है चूस, ग्रोथ के ख़्वाब दिखाए ||

 खत,जो कभी पहुँच नहीं पाए !(२)
संतोष त्रिवेदी 
 बैसवारी baiswari 

लगता है लिख जायगी, उपन्यास दमदार |
रॉयल्टी कैसे बंटे, सब ना लेना मार |
सब ना लेना मार, बराबर का हिस्सा है |
एक अकेला नहीं, युगल युग का किस्सा है |
नाले नदी कगार, प्यार अब भी है जगता |
रविकर जी हलकान,  उन्हें अच्छा ना लगता ||

आनुवंशिक तौर पर सुधरी फसलों की हकीकत ,कितना खतरनाक है यह खेल जो खेला जा रहा है .(दूसरी क़िस्त ) .


Virendra Kumar Sharma 
धरती बंजर कर रहा, पौरुष पर आघात |
सत्यानाशी बीज का, छल कपटी आयात |

छल कपटी आयात, जड़ों हिजड़ों की पीड़ा |
करते दावा झूठ, फसल को खाता कीड़ा |


बढे कर्ज का बोझ, बड़ी आबादी मरती |
उत्पादन घट जाय, होय बंजर यह धरती ||

करकश करकच करकरा, कर करतब करग्राह  । 
तरकश से पुरकश चले, डूब गया मल्लाह ।  

डूब गया मल्लाह, मरे सल्तनत मुगलिया ।  
जजिया कर फिर जिया, जियाये बजट हालिया ।

धर्म जातिगत भेद, याद आ जाते बरबस । 
जीता औरंगजेब, जनेऊ काटे करकश ।  
करकश=कड़ा      करकच=समुद्री नमक 
करकरा=गड़ने वाला
कर = टैक्स
करग्राह = कर वसूलने वाला राजा

Madan Mohan Saxena 

  उच्चस्तर पर सम्पदा, रहे भद्रजन लूट ।
संचित जस-तस धन करें, खुली मिली है छूट ।  

खुली मिली है छूट, बटे डीरेक्ट कैश अब ।
मनरेगा से वोट, झपटता पंजा सरबस । 

लेकिन मध्यम वर्ग, गिरे गश खा कर रविकर ।
मंहगाई-कर जोड़,  छुवें दोनों  उच्चस्तर ॥ 

सौदायिक बिन व्याहता, करने चली सिंगार |
गहने पहने मांग कर, लेती कई उधार |

(भाजपा की ओर इशारा)

 लेती कई उधार, खफा पटना पटनायक | 

 खानम खाए खार, करे खारिज खलनायक |
(जदयू, बीजद , मुस्लिम) 

हौदा हाथी रहित, साइकिल बिना घरौंदा |
 नहीं हिन्दु में ताब, पटे ना मोदी सौदा ||

(माया-मुलायम)

सौदायिक= स्त्री-धन नइखे= नहीं


बस तुम्‍हारी हँसी !!!

सदा 
 SADA  

  प्रियतम की मुस्कान का, निश्चित करती मोल |
पर आंसू की मोल को, नहीं रही तू खोल |

 

6 comments:

  1. बेहतरीन लिंक्‍स एवं प्रस्‍तुति

    सादर आभार

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  2. सुन्दर लिंकों से सजा लिंक लिखाड़ !!
    आभार !!

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  3. लिंक के अलावा आज का शीर्षक भी गजब और मजेदार है

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  4. बेहतरीन लिंक्स | लाजवाब लेखन |


    यहाँ भी पधारें और लेखन पसंद आने पर अनुसरण करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  5. बेहतरीन प्रस्तुतिकरण,शीर्षक तो लाजबाब.

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