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Saturday, 17 November 2012

बोल बोलता बाल है, या भैया *बोल्लाह -




"मौसम नैनीताल का" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

दिल मे समा गया

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  वाह गुरूजी मस्त हैं, घूमें नैनीताल ।
यहाँ सर्दियों ने करी, सर्दी में हड़ताल ।।


"रिटायर हो रहा हूं"

ये तो होना ही था

बन्धु हमारे हो रहे, आज रिटायर यार |
जीवन में सच में बही, सबसे भली बयार ||

60 प्रतिशत की छूट.....देखा है कभी ऐसा ऑफर ?

बिल्कुल नहीं ………:)



सौ की पुस्तक आजकल, चालिस में मिल जाय |
इससे बढ़िया क्या सखे, तीन तीन ले आय ||


ठोकरों का मारा....यह दिल बेचारा !!!

 आखिर कब तक अपनी लाश ढोयेगा

 जब तक वो रब न मिले, रहें काम में व्यस्त |
माटी को रखना सही, यादें रहें दुरुस्त ||

राहुल गांधी बोले तो पोंsपोंs पोंपोंs..पोंsss

महेन्द्र श्रीवास्तव 

बोल बोलता बाल है, या भैया *बोल्लाह । 
मिला बुलावा है हमें, बोलवाना है वाह ।। 
( बोलवाना/बोल्लाह की एक मात्रा कम करके बोलना है )

*एक प्रकार का घोडा ।।
शायद शादी वाला ही -



3 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रविष्टि वाह!

    इसे भी अवश्य देखें!

    चर्चामंच पर एक पोस्ट का लिंक देने से कुछ फ़िरकापरस्तों नें समस्त चर्चाकारों के ऊपर मूढमति और न जाने क्या क्या होने का आरोप लगाकर वह लिंक हटवा दिया तथा अतिनिम्न कोटि की टिप्पणियों से नवाज़ा आदरणीय ग़ाफ़िल जी को हम उस आलेख का लिंक तथा उन तथाकथित हिन्दूवादियों की टिप्पणयों यहां पोस्ट कर रहे हैं आप सभी से अपेक्षा है कि उस लिंक को भी पढ़ें जिस पर इन्होंने विवाद पैदा किया और इनकी प्रतिक्रियायें भी पढ़ें फिर अपनी ईमानदार प्रतिक्रिया दें कि कौन क्या है? सादर -रविकर

    राणा तू इसकी रक्षा कर // यह सिंहासन अभिमानी है

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  2. वाह सर वाह क्या बात है, बहुत खूब

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  3. बढिया लिंक्स
    मुझे शामिल करने के लिए आभार

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