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Friday, 9 November 2012

खूब पटाखे दागिए, मार विषाणु घसीट-




देह देहरी देहरा, दो, दो दिया जलाय -

 
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देह देहरी देहरा,  दो, दो दिया जलाय ।
कर उजेर मन गर्भ-गृह, कुल अघ-तम दहकाय । 
कुल अघ तम दहकाय , दीप दस  घूर नरदहा ।
गली द्वार पिछवाड़ , खेत खलिहान लहलहा ।
देवि लक्षि आगमन, विराजो सदा हे हरी ।
सुख सामृद्ध सौहार्द, बसे कुल देह देहरी ।।

 देह, देहरी, देहरा = काया, द्वार, देवालय 
घूर = कूड़ा 
लक्षि  = लक्ष्मी 
 

मत्तगयन्द सवैया  
दीवाली में जुआ  
मीत समीप दिखाय रहे कुछ दूर खड़े समझावत हैं ।
 
बूझ सकूँ नहिं सैन सखे  तब हाथ गहे लइ जावत हैं ।
 
जाग रहे कुल रात सबै, हठ चौसर में फंसवावत  हैं ।
 
हार गया घरबार सभी, फिर भी शठ मीत कहावत हैं ।।
 
 

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक - २५


पहली प्रस्तुति  
   डेंगू-डेंगा सम जमा, तरह तरह के कीट |
    खूब पटाखे दागिए, मार विषाणु घसीट |
    मार विषाणु घसीट, एक दिन का यह उपक्रम |
    मना एकश: पर्व, दिखा दे दुर्दम दम-ख़म |
    लौ में लोलुप-लोप, धुँआ कल्याण करेगा |
    सह बारूदी गंध, मिटा दे डेंगू-डेंगा ||

1 comment:

  1. देह देहरी देहरा, दो, दो दिया जलाय ।
    कर उजेर मन गर्भ-गृह, कुल अघ-तम दहकाय ।
    कुल अघ तम दहकाय , दीप दस घूर नरदहा ।
    गली द्वार पिछवाड़ , खेत खलिहान लहलहा ।
    देवि लक्षि आगमन, विराजो सदा हे हरी ।
    सुख सामृद्ध सौहार्द, बसे कुल देह देहरी ।।

    देह, देहरी, देहरा = काया, द्वार, देवालय
    घूर = कूड़ा
    लक्षि = लक्ष्मी

    संस्कृति को सूक्ष्म तमस्तर पर समेटे है यह मनोहर रचना दिवाली मुबारक .

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