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Monday, 12 November 2012

होते गये तिहाड़ी मंत्री, सत्ता मगर बचा ले कोई- संशोधन के बाद

देह देहरी देहरे, दो, दो दिया जलाय-रविकर


Ganesh

 शुभकामनायें 

दीपावली 2012

Lakshmi
बोला न , 
सीख रहा हूँ गजल ।
बताइये, 
दिशा सही है या नहीं  -



पुरानी रचना -

 13 September 2011

आलू यहाँ उबाले कोई  |
बना पराठा खा ले कोई ||


तोला-तोला ताक तोलते,
सोणी देख भगा ले कोई ||


जला दूध का छाछ फूंकता
छाछे जीभ जला ले कोई ||


जमा शौक से  करे खजाना
आकर  उसे  चुरा ले कोई ||


लेता  देता  हुआ  तिहाड़ी
पर सरकार बचा ले कोई ||


रविकर कलम घसीटे नियमित
आजा प्यारे गा ले कोई ||
14 मास बाद संशोधन 
     22 12 122 22 


    आलू यहाँ उबाले कोई  |
      खाये बना पराठे कोई ||

    ताका-तका तकाते तो थे-
    सोणी हटुक भगाले कोई |

    दूधक जला फुंकाए छाछो 
      जल से गला जलाले कोई |

    करता जमा खजाना हीरो -
    आकर उसे  चुरा ले कोई ||

      होते गये तिहाड़ी मंत्री   
      सत्ता मगर बचा ले कोई ||

      रविकर कलम घसीटे नियमित
    गुनगुन गुना गुना ले कोई ||
 

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    दीपावली की शुभकामनाएँ!

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  2. दीपावली की शुभकामनाएँ!

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  3. निरंतर परिपक्वता की और बढ़ते कदम -

    होते गये तिहाड़ी मंत्री
    सत्ता मगर बचा ले कोई ||

    गजल से गजल तक अशआर पा रहें हैं निखार और गेयता .सार और विस्तार .

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  4. दीपों की यह है कथा,जीवन में उजियार
    संघर्षो के पथ रहो, कभी न मानो हार,

    दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ,,,,
    RECENT POST: दीपों का यह पर्व,,,

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  5. दोनों ही गज़लें अच्छी हैं ..मेरे विचार में पहले वाली अधिक अच्छी है...

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