Follow by Email

Thursday, 29 November 2012

लेता ग्राहक धूर्त, राष्ट्रवादी यह खोता-रविकर

 

कार्टून कुछ बोलता है -उज्जैन का खोता मेला

दिखा पिछाड़ी जो रहा, रविकर वही अमूर्त |
दो कौड़ी में बिक गया, लेता ग्राहक धूर्त |
 
लेता ग्राहक धूर्त, राष्ट्रवादी यह खोता |
खोता रोता रोज, यज्ञ आदिक नहिं होता |
खुली विदेशी शॉप, खींचता उनकी गाड़ी |
बनता लोमड़ जाय, अनाड़ी दिखा पिछाड़ी ||

विवाहेतर सम्बन्ध (लेख)

Kavita Verma

सपने ज्यादा गति बढ़ी, समय किन्तु घट जाय |
महत्वकांक्षा अहम् मद, मेटे नहीं मिटाय | 
मेटे नहीं मिटाय, गौण बच्चे का सपना |
घर-ऑफिस बाजार, स्वयं ही हमें निबटना |
मांगे हम अधिकार, लगे कर्तव्य खटकने | 
भोगवाद की जीत, मिटे ममता के सपने ||


अधूरे सपनों की कसक : एक विश्लेषण और उपलब्धि !

रेखा श्रीवास्तव 
 न्यौछावर सपने किये, अपने में संतुष्ट ।
मातु-पिता पति प्रति सजग, पुत्र-पुत्रियाँ पुष्ट ।
पुत्र-पुत्रियाँ पुष्ट, वही सपने बन जाते ।
खुद से होना रुष्ट, यही तो रहे भुलाते ।
सब रिश्तों में श्रेष्ठ, बराबर बैठा ईश्वर ।
परम-पूज्य है मातु, किया सर्वस्व निछावर ।।

फेसबुक तनाव देता है सिब्बल एंड पार्टी को..

ZEAL 
टेंसन देता फेसबुक, लेता सिब्बल लेट ।
यह तो है मस्ती भरा, तिकड़म तनिक समेट ।
तिकड़म तनिक समेट, तीन से बचना डेली ।
मोहन राहुल मॉम, बड़ी घुड़साल तबेली ।
सो जा चद्दर तान, भली भगवान् करेंगे ।
कर मोदी गुणगान, जिरह बिन नहीं मरेगा ।।

'दिल' और 'दिमाग'

विवेक मिश्र  

दिल-दिमाग में पक रही, खिचड़ी नित स्वादिष्ट ।
दिल को दूजा दिल मिला, नव-रिश्ते हों श्लिष्ट ।
नव-रिश्ते हों श्लिष्ट, मस्त हो जाती काया ।
पर दिमाग अति-क्लिष्ट, नेक दिल को भरमाया ।
पड़ती दिल में गाँठ, झोंकता प्रीत आग में । 
दिल बन जाय दिमाग, फर्क नहिं दिल दिमाग में ।। 

 ram ram bhai
डायन यह प्रौद्यिगिकी, बेवफा हुश्न  के बैन ।
उल्लू जागे रातभर, गोली खाय कुनैन ।
गोली खाय कुनैन, अर्धनिद्रा बेचैनी ।
देखे झूठे सैन, ताकता फिर मृग-नैनी ।
बढ़े मूत्र का जोर, टेस्ट मधुमेह करायन ।
औषधि नियमित खाय, खाय पर निद्रा-डायन ।। 

पुस्तकें मौन हैं !

संतोष त्रिवेदी  
महबूबा नाराज है, कूड़े में सरताज ।
बोल चाल कुल बंद है, कौन उठावे नाज ।
कौन उठावे नाज, अकेले खेले झेले ।
तीनों बन्दर मस्त, दूर सब हुवे झमेले ।
खाली कर ये रैक, पुस्तकें नहीं अजूबा ।
करदे या तो पैक, रही अब न महबूबा ।।

इक ऐसा सच!!!

Rajesh Kumari 

व्यथा मार्मिक है सखी, शुरू कारगिल युद्ध ।
तन मन में  हरदम चले, वैचारिकता क्रुद्ध ।
वैचारिकता क्रुद्ध , पकड़ जग-दुश्मन लेता ।
दुष्ट दानवी सोच, छेद वह काया देता ।
लड़िये जब तक सांस, कामना सत्य हार्दिक ।
रखिये याद सहेज, बड़ी यह व्यथा मार्मिक ।।

 ब्लॉगर होते जा रहे, पॉलिटिक्स में लिप्त |
राजग यू पी ए भजें, मिला मसाला तृप्त |

मिला मसाला तृप्त, उठा ले लाठी डंडा |
बने प्रचारक पेड, चले लेखनी प्रचंडा |

धैर्य नम्रता ख़त्म, दांत पीसे अब रविकर |
दे देते हैं जख्म, कटकहे कितने ब्लॉगर -

 आसक्ति की मृगतृष्णा

जोड़-गाँठ कर तह करे, जीवन चादर क्षीण ।
बाँध-बूँध कर लें छुपा, विचलित मन की मीन । 

विचलित मन की मीन, जीन का किया परीक्षण ।

बढ़े लालसा काम, काम नहिं आवे शिक्षण ।

नोट जमा रंगीन, सीन को चूमे रविकर ।

'पानी' मांगे मीन, मरे पर जोड़-गाँठ कर । 

8 comments:

  1. कार्टून कुछ बोलता है -उज्जैन का खोता मेला

    दिखा पिछाड़ी जो रहा, रविकर वही अमूर्त |
    दो कौड़ी में बिक गया, लेता ग्राहक धूर्त |
    लेता ग्राहक धूर्त, राष्ट्रवादी यह खोता |
    खोता रोता रोज, यज्ञ आदिक नहिं होता |
    खुली विदेशी शॉप, खींचता उनकी गाड़ी |
    बनता लोमड़ जाय, अनाड़ी दिखा पिछाड़ी ||

    बढ़िया मारा है निचोड़ के संसदीय खोतों को .बधाई .
    वो वो कहकहे

    वो वो वो

    ReplyDelete

  2. सटीक विश्लेषण लेकिन कुछ तो बे -वफाई के जीन (जीवन खंड )भी होतें हैं .परिवर्तन प्रकृति का नियम है पूरब पश्चिम का विलय हुआ चाहता है .

    अधूरे सपनों की कसक : एक विश्लेषण और उपलब्धि !
    रेखा श्रीवास्तव
    मेरी सोच
    न्यौछावर सपने किये, अपने में संतुष्ट ।
    मातु-पिता पति प्रति सजग, पुत्र-पुत्रियाँ पुष्ट ।
    पुत्र-पुत्रियाँ पुष्ट, वही सपने बन जाते ।
    खुद से होना रुष्ट, यही तो रहे भुलाते ।
    सब रिश्तों में श्रेष्ठ, बराबर बैठा ईश्वर ।
    परम-पूज्य है मातु, किया सर्वस्व निछावर ।।

    ReplyDelete
  3. .माया तू न गई मेरे मन से /माया तेरे तीन नाम ,परसी पर्सा ,परसराम /माया महा ठगनी हम जानी ...कोई सुने तब न एक ओब्सेसन है माया ....भ्रम है हेलुसिनेसन है ,सटीक पोस्ट .
    आसक्ति की मृगतृष्णा
    सुज्ञ

    जोड़-गाँठ कर तह करे, जीवन चादर क्षीण ।
    बाँध-बूँध कर लें छुपा, विचलित मन की मीन ।
    विचलित मन की मीन, जीन का किया परीक्षण ।
    बढ़े लालसा काम, काम नहिं आवे शिक्षण ।
    नोट जमा रंगीन, सीन को चूमे रविकर ।
    'पानी' मांगे मीन, मरे पर जोड़-गाँठ कर ।

    ReplyDelete
  4. कभी बे -सबब रहा करो ,

    कभी कुछ भी न किया करो ,

    कभी यूं ही कुछ किया करो ,

    कभी बे -वजह फिरा करो ,

    मुख चिठ्ठे पे भी दिखा करो ...

    वो वो कहकहे

    फेसबुक तनाव देता है सिब्बल एंड पार्टी को..
    ZEAL
    ZEAL
    टेंसन देता फेसबुक, लेता सिब्बल लेट ।
    यह तो है मस्ती भरा, तिकड़म तनिक समेट ।
    तिकड़म तनिक समेट, तीन से बचना डेली ।
    मोहन राहुल मॉम, बड़ी घुड़साल तबेली ।
    सो जा चद्दर तान, भली भगवान् करेंगे ।
    कर मोदी गुणगान, जिरह बिन नहीं मरेगा ।।

    ReplyDelete
  5. बदमाश है स्पैम बोक्स किसी बदजात सा .पी गया टिप्पणियाँ .

    ReplyDelete
  6. सुंदर टिप्पणियों से सटीक विश्लेषण,,,

    ReplyDelete