Follow by Email

Friday, 18 May 2012

बस नितम्ब सहलाय, हँसे गोपी यदुरानी -

धन्य-धन्य भाग्य तेरे यदुरानी ,तुझको मेरा शत-शत नमन



यदुरानी तू धन्य है, धन्य हुआ गोपाल ।
दही-मथानी से रही, माखन प्रेम निकाल ।

माखन प्रेम निकाल, खाय के गया सकाले ।
ग्वालिन खड़ी निढाल, श्याम माखन जब खाले ।

जकड कृष्ण को लाय, पड़े  दो दही मथानी ।
बस नितम्ब सहलाय, हँसे गोपी यदुरानी ।।

9 comments:

  1. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    ReplyDelete
  2. यदुरानी तू धन्य है, धन्य हुआ गोपाल ।
    दही-मथानी से रही, माखन प्रेम निकाल ।
    sundar shbd chitr bhaav pravan kartaa sneh sansikt .

    ReplyDelete
  3. sundar shbd chitr sneh sinchit .

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर !

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर,..अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete
  6. यह आध्यात्मिक भाव भी अच्छा लगा।

    ReplyDelete
  7. सुन्दर अधात्मिक भाव्

    ReplyDelete
  8. अद्भुत... जय श्री कृष्ण

    ReplyDelete