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Tuesday, 29 May 2012

"उच्चारण" पर हाय, पड़े गर्दन पर फंदा-


"महँगाई-छः दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



मुंह की और मसूर की, लाल लाल सी दाल |
डाल-डाल पर बैठकर, खाते रहे दलाल |

खाते रहे दलाल, खाल खिंचवाया करते |
निर्धन श्रमिक किसान, मौत दूजे की मरते |

"उच्चारण" पर हाय, पड़े गर्दन पर फंदा |
सिसक सिसक मर जाय, आज का सच्चा बंदा ||



तभी पढ़ें जब आपके पास प्रमाण-पत्र हो !



चना अकेला चल पड़ा, खड़ा बीच बाजार |
ताल ठोकता गर्व से, जो फोड़ा सौ भार |


जो फोड़ा सौ भार, लगे यह लेकिन सच ना |
किन्तु रहे हुशियार, जरा घूँघट से बचना |


केवल मुंह को ढांप, निपटती प्रात: बेला |
सरे-शाम मैदान, सौंचता चना अकेला ||





घूँघट बुर्का डाल के, बैठ चौक पर जाय |
टिकट ख़रीदे क्लास जो, वो ही दर्शन पाय |

वो ही दर्शन पाय, आपकी  मेहरबानी  |
रविकर सा नाचीज, ढूँढिये बेहतर जानी |



सज्जन का क्या काम, निमंत्रित कर ले मुंह-फट |
दो सौ डालर डाल, उठा देंगे वे घूँघट ||

11 comments:

  1. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

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  2. पूरा धमाका कर दिया है !!

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  3. सुंदर प्रस्तुति

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  4. http://www.blogger.com/blogin.g?blogspotURL=http://mypoeticresponse.blogspot.in/2012/05/blog-post_30.html

    कहाँ मिलता है निडरता का प्रमाणपत्र ??
    मिस निडर-

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  5. दोनों लिंक मस्त है और आपका योगदान तो खैर महामस्त है ही :)

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    पोस्ट साझा करने के लिए आभार!
    सभी छंद सार्थक हैं!

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  7. अति सुंदर!

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  8. सुंदर टिप्पणियाँ पढ़ी, घूमा देखा लिंक।
    अदा निराली आपकी, देखा, होता सिंक॥


    सादर...

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  9. मुंह की और मसूर की, लाल लाल सी दाल |
    डाल-डाल पर बैठकर, खाते रहे दलाल |

    मुंह की और मसूर की, लाल लाल सी दाल |
    डाल-डाल पर बैठकर, खाते रहे दलाल |
    सज्जन का क्या काम ,यहाँ रहते सब दुर्जन..बधाई प्रस्तुति . यहाँ भी पधारें -
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/

    उतनी ही खतरनाक होती हैं इलेक्त्रोनिक सिगरेटें
    ram ram bhai
    बृहस्पतिवार, 31 मई 2012
    शगस डिजीज (Chagas Disease)आखिर है क्या ?
    शगस डिजीज (Chagas Disease)आखिर है क्या ?

    माहिरों ने इस अल्पज्ञात संक्रामक बीमारी को इस छुतहा रोग को जो एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुँच सकता है न्यू एच आई वी एड्स ऑफ़ अमेरिका कह दिया है .

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

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