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Tuesday, 22 May 2012

जुड़े लोकहित आय, एकजुट रहिये ब्लॉगर-



ब्लॉगर भी बँटने लगे, भैया क्या इस बार |
बाँट-बूट के पॉलटिक्स, जैसा  बंटाधार |

जैसा  बंटाधार, बदलिए रविकर फितरत |
बँटते रहे सदैव, होइए अभिमत सम्मत |

होवे जड़ चैतन्य, पहल रचनात्मक सादर |
जुड़े लोकहित आय, एकजुट रहिये ब्लॉगर ||



लेखकीय स्वाभिमान के निहितार्थ


दम्भी ज्ञानी हर सके, साधुवेश में नार |
नीति नियम ना सुन सके, झटक लात दे मार |

झटक लात दे मार, चाहता लल्लो-चप्पो |
झूठी शान दिखाय, रखे नित हाई टम्पो |

जाने ना पुरुषार्थ, करे पर बात सयानी |
नहीं शमन अभिमान, करे ये दम्भी-ज्ञानी ||

भ्रूण जीवी स्वान

veerubhai at कबीरा खडा़ बाज़ार में 
 
मुंडे डाक्टर मारता, गर्भ-स्थिति नव जात |
कुक्कुर को देवे खिला, छी छी छी हालात |

छी छी छी हालात, काट के बोटी-बोटी |
मारो सौ सौ लात, भूत की छीन लंगोटी |

करिहै का कानून, अभी जब कातिल गुंडे |
रहम याचिका थाम, पाक ले छूटे मुंडे ||


6 comments:

  1. ऐसा क्या है इन पुरुस्कारों में जिसे प्राप्त करने के लिए ब्लोगर टुच्चा गिरी पर उतर आये हैं...हैरानी होती हैं ऐसे होनहार पढ़े लिखे समझदार ब्लोगर तुच्छ पुरुस्कारों के लिए कैसी मारा मारी पर उतर आये हैं...क्या ब्लोगिंग का उद्देश्य पुरूस्कार पाना ही है, वो भी ऐसे पुरूस्कार जिनकी कोई मान्यता ही नहीं है...

    नीरज

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  2. होवे जड़ चैतन्य, पहल रचनात्मक सादर |
    जुड़े लोकहित आय, एकजुट रहिये ब्लॉगर ||

    बहुत अच्छी प्रस्तुति,,,,

    RECENT POST काव्यान्जलि ...: किताबें,कुछ कहना चाहती है,....

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  3. बहुत सार्थक टिप्पणियां...आभार

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  4. सार्थक प्रस्तुति...

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  5. पिछले साल सम्मान समारोह से पहले आवाज़ उठाने वाले अकेले हम ही थे।
    सम्मान समारोह से लौटकर काफ़ी ब्लॉगर्स ने बताया कि वहां उनका इस्तेमाल कितनी चालाकी से किया गया ?

    इस बार इतने ब्लॉगर्स की तरफ़ से कड़ी प्रतिक्रिया मिलेगी, इसका अंदाज़ा उन्हें नहीं था।
    अब यह सम्मान एक मज़ाक बनकर रह गया है।

    धन्यवाद !

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