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Monday, 21 May 2012

माली बनकर छले, खले मालिक मदमाता-

मतदाता , मालिक या माली ?

S.N SHUKLA at काल चिंतन
मतदाता दाता नहीं, केवल एक प्रपंच |
एक दिवस के वास्ते, मस्का मारे मंच |

मस्का मारे मंच, महा-मुश्किल में *मालू |
इसका क्या विश्वास, बिना जड़ का अति-चालू |


माली बनकर छले, खले मालिक मदमाता |
मालू जाय सुखाय, मिटे मर मर मतदाता ||
*लता

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति है रविकर जी .
    माली बनकर छले, खले मालिक मदमाता |
    मालू जाय सुखाय, मिटे मर मर मतदाता ||
    आलू की मानिंद बिकें नित नित मतदाता

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  2. वाह ,,,, बहुत अच्छी प्रस्तुति,,,,

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