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Wednesday, 17 October 2012

साधारण सा ब्लॉग, मिले दो सौ हिट दिन में-रविकर






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जानू मैं जानू तुम्हें, बे-इन्तिहा दुलार ।
बिना टिप्पणी ही सही, आते तो हो द्वार ।

आते तो हो द्वार, सदा एहसान तुम्हारा ।
हो जाता है धन्य, हमारा छपना सारा ।

साधारण सा ब्लॉग, मिले दो सौ हिट दिन में  ।
रविकर की कुंडली, ख़ास कुछ तो है इनमे ।।

स्तन-पान संतान, करे जो तेरा बहना -

  पसरे सौष्ठव चेतना, अधिक देह पर ध्यान ।
अमृत से महरूम है, वह नन्हीं सी जान । 
वह नन्हीं सी जान, मान ले मेरा कहना ।
स्तन-पान संतान, करे जो तेरा बहना ।
शिशू निरोगी होय, घटे कैंसर के खतरे ।
 बाढ़े  शाश्वत प्रेम, नहीं बीमारी पसरे ।|

घोटा जा सकता नहीं, कह बेनी अपमान ।
बड़े खिलाड़ी बेंच पर, रे नादाँ सलमान ।
रे नादाँ सलमान, जहाँ अरबों में खेले ।
अपाहिजी सामान, यहाँ तू लाख धकेले ।
इससे अच्छा बेंच, धरा पाताल गगन को ।
हो बेनी को  गर्व, बेंच दे अगर वतन को ।।



वीरू भाई कवि -हृदय 
 इटली का दामाद, बना भारत का जीजा ।
पासपोर्ट पे फ्री, लगा इटली का वीजा ।

 चाँदी कूटे सिंह सियार सलमान डिसूजा 
  भाई भतीजावाद, पार्टी पास्ता पीजा ।।

होंठ भींच कर रखो जोर से  तेरी बारी   -
नमक डाल जख्मों को उसने खुरचा मींजा ।।

कश्मीरी अपने को कहते जाकर रह लें-
कभी दुर्दशा पर इनका दिल नहीं पसीजा ।।

स्वर्ग देश का आज सहे प्राणान्तक पीड़ा  
मस्ती में मशगूल फेमिली जन-गण खीजा ।


बुराई पर अच्छाई की विजय

आशा जोगळेकर 

सौ दिन जीते बुरा पर, इक दिन जीते सत्य |
बुरा हमेशा त्याज्य है, सत्य हमेशा पथ्य |
सत्य हमेशा पथ्य, कठिन यह डगर हमेशा |
हो सकता उड़ जाय, बदन का रेशा रेशा |
फिर भी रविकर सत्य, बिना नहिं जीवन बीते |
क्या लम्बी जिंदगी, सही से सौ दिन जीते ||


गंगा-दामोदर ब्लॉगर्स एसोसियेशन 

गोष्ठी की तिथि आगे बढानी पड़ेगी -

आदरणीय / आदरेया !!

जन संस्कृति मंच का अखिल भारतीय सम्मलेन 4 नवम्बर को गोरखपुर में हो रहा है-
सूचना मिली है कि धनबाद के हमारे 
वरिष्ठ ब्लॉगर और सहयोगी 
आदरणीय उमा जी इस कार्यक्रम में भाग लेने गोरखपुर जा रहे हैं-
उनकी अनुपस्थिति से हमें 
अपनी गोष्ठी की तिथि (4 नवम्बर ) आगे बढानी पड़ेगी  |
असुविधा के लिए खेद है-
(नई तिथि की सूचना आपसे विमर्श के बाद-) 

सादर -
रविकर

दहेज – दुर्मिल सवैया

आइये, विचार साझा करें
तन मानव का मति दानव की,धन-लोलुप निर्मम दुष्ट बड़े
उजले कपड़े नकली मुखड़े , मुँह फाड़ खड़े  अकड़े-अकड़े
बन हाट बजार बियाह गये , विधि नीति कुछेक गये पकड़े
कुछ युक्ति करो भय मुक्त करो,यह रीत बुरी जड़ से उखड़े ||

  1. भाई रही संभालती, उसे डांट स्वीकार्य ।
    दो संतानों में बड़ी, सुता करे गृह कार्य ।
    सुता करे गृह कार्य, करे वर्षों वह सेवा ।
    दोयम दर्जा मिला, मिले कब सेवा मेवा ।
    जाती अब ससुरारि, बुजुर्गों बाँट कमाई ।
    करो चवन्नी खर्च, बचा पाए सब भाई ।।





    1. उसको बढते देख पिता का , दिल दुःखों से भर जाता.
      लाऊं कहाँ से दहेज सोचकर,पिताका मन है घबराता!
      सारी दुनिया कहती है आज, कि भेद नही बेटा- बेटी में,
      यही सोच कर लुटा दिया ,पिता ने जो धन था गठरी में!
    2. पाई - पाई जोड़ता , बाबुल टूटो जाय
      ये दहेज दानव भया,बिटिया-मन अकुलाय
      बिटिया-मन अकुलाय,बनी क्यों ऐसी रीतें
      लालच की बुनियाद ,खड़ी घर में ही भीतें
      माँ शंकित चुपचाप , परेशानी में भाई
      बाबुल टूटो जाय , जोड़ता पाई - पाई ||
    3. एक पक्ष यह भी --
      दाहिज दुल्हन माँग रही, अपनी जननी ढिग माँग सुनावे |
      माँग भरी जब जाय रही, वह माँग रही तब जो मन भावे |
      जो मइके कम मान मिले, भइया जियरा कसके तड़पावे |
      दाहिज का यह रोग बुरा, पहिले ज़र बाँट जमीन बटावे | |
       

हरियाणा में 4 प्लेट चाउमीन के साथ 4 लड़के पकडे गए.

NEERAJ PAL 
प्लेट चाऊ-मिन की रही, बढ़ा प्रसभ दुर्योग |
खान-पान का फर्क है, बढ़ा विलासी भोग |
बढ़ा विलासी भोग, खोज मंत्री हरियाणा |
कैसे राज्य निरोग, बताता बड़ा सयाणा |
फास्ट फूड से जल्द, ऋतुमती बाला होती |
प्लेट डेट से भेंट, जिंदगी कांटे बोटी || 



असल मुद्दा यह है केजरी वाल साहब !सरकार विपथगामी हो गई है

Virendra Kumar Sharma 

गए खोजने गडरिया, बहेलिया मिल जाए |
उग्र केजरी लोमड़ी, तीरों से हिल जाए |

तीरों से हिल जाए , फुलझड़ी निकला गोला |
फुस फुस दे करवाए, व्यर्थ ही हल्ला बोला |

सदाचार केजरी, अल्पमत सच्चे वोटर |
बनवाएं सरकार, बटेरें तीतर मिलकर ।।

8 comments:

  1. वाह...!
    सभी छंदबद्ध रचनाएँ बहुत सुन्दर हैं!

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  2. वाह ... बेहतरीन प्रस्‍तुति

    सादर

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  3. वाह: दो सौ हिट दिन में-..?????? बधाई..

    ReplyDelete
  4. पसरे सौष्ठव चेतना, अधिक देह पर ध्यान ।

    अमृत से महरूम है, वह नन्हीं सी जान ।


    वह नन्हीं सी जान, मान ले मेरा कहना ।


    स्तन-पान संतान, करे जो तेरा बहना ।


    शिशू निरोगी होय, घटे कैंसर के खतरे ।


    बाढ़े शाश्वत प्रेम, नहीं बीमारी पसरे ।|स्तन पान एक फायदे अनेक .


    कबीरा खडा़ बाज़ार में


    वीरू भाई कवि -हृदय
    इटली का दामाद, बना भारत का जीजा ।
    पासपोर्ट पे फ्री, लगा इटली का वीजा ।

    चाँदी कूटे सिंह सियार सलमान डिसूजा
    भाई भतीजावाद, पार्टी पास्ता पीजा ।।

    होंठ भींच कर रखो जोर से तेरी बारी -
    नमक डाल जख्मों को उसने खु

    रचा मींजा ।।

    भाई साहब उलटी सीधी चंद पंक्तियाँ लिखकर भेजी ,रविकर जी ने ताल ठोक दी .आशु कवि हैं आप ब्लॉग जगत के .वीरुभाई .
    WEDNESDAY, 17 OCTOBER 2012

    साधारण सा ब्लॉग, मिले दो सौ हिट दिन में-रविकर

    http://dineshkidillagi.blogspot.com/

    ये हैं ब्लॉग जगत के आशु कवि रविकर (दिनकर जी ),ब्लॉग चक्रधर .बधाई इस अप्रतिम रचना के लिए .

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  5. लिंक लिख्खाड से भी टिप्पणियाँ गायब हो रहीं हैं यहाँ से भी ,ऐसे में टिपण्णी कार का हौसला टूटता है .

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  6. स्तन-पान संतान, करे जो तेरा बहना ।


    शिशू निरोगी होय, घटे कैंसर के खतरे ।।।।।।।।।।।शिशु .........कृपया शिशु कर लें ........

    बधाई बेहतरीन सजावट की चर्चा मंच छा रहा है .

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  7. बेहतरीन सामयिक कुंडलियाँ छंद रचनाएं आपका ब्लॉग यूँ ही उन्नति के शिखर पर चढ़ता रहे शुभकामनाएं

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