Follow by Email

Wednesday, 3 October 2012

बहन शिवा की आ गई, हर्ष चरम उत्कर्ष -


बुड्ढा होय अशक्त, आत्मा भटका हाथी-

 घोंघे करते मस्तियाँ, मीन चुकाती दाम ।
कमल-कुमुदनी से पटा, पानी पानी काम ।
पानी पानी काम, केलि कर काई कीचड़ ।
रहे नोचते *पाम, काइयाँ  पापी लीचड़ ।
भौरों की बारात, पतंगे जलते मोघे  ।। 
श्रेष्ठ विदेही पात, नहीं बन जाते घोंघे ।
*किनारी की छोर पर लगी गोटी

ZEAL 

नर मादा नर्मदा हुई, मर जादा मर्याद ।
जैसा लिखता है सचिव, वैसा करती याद ।
वैसा करती याद, इलाज करवा कर आई ।
अब चुनाव के बाद, पुन: जाएगी माई ।
किन्तु अलग उद्देश्य, निभाई खुदरा वादा ।
लेगी टैक्स वसूल,  पूज कर के नर-मादा ।

 काव्य मंजूषा
कुत्ता यह खुजरैल है, है आश्विन का मास ।
ऐसे जीवों से हुआ, कल्चर सत्यानाश ।
कल्चर सत्यानाश, ताश का है यह छक्का ।
ढूँढे बेगम हुकुम, धूर्त है बेहद पक्का ।
बाढ़ी है तादाद, बाढ़ते कुक्कुरमुत्ता ।
बधिया कर दो राम, नस्ल रोको यह कुत्ता ।।

...आंसू आ गए होंगे

रश्मि 

यूँ ही जाते लड़खड़ा, कदम चले जो दूर ।
कहते क्यूँ यह हड़बड़ा, आखिर क्यूँ मजबूर ।
आखिर क्यूँ मजबूर, हकीकत तुम भी जानो ।
गम उसको भरपूर, बात मानो ना मानो ।
कैसे सहे विछोह, आत्मा यह निर्मोही ।
समझ हृदय की पीर, करो ना बातें यूँ  ही ।।

ओह!! तो ये बात है!??

 
 
कोयल मंत्री का मिले, अब इनको पदभार ।
बड़े घुटाले हैं किये, इन पर ही एतबार ।
इन पर ही एतबार, नया नव दिन ही रहता ।
भूल गए यह बात, पुराना सब दिन कहता ।
लेकिन मंत्री तेज, कोयला दूधे धोयल ।
बीबी मइके  भेज, ढूँढ़ता नइकी  कोयल ।।


मनु बिटिया : जन्म-दिवस की शुभकामनायें-


आश्विन की तिथि पञ्चमी, रहा नवासी वर्ष,
बहन शिवा की आ गई,  हर्ष  चरम  उत्कर्ष  |
हर्ष  चरम  उत्कर्ष, शीघ्र  ही  लगी  डोलने,
ताला - चाभी  फर्श,  पेटिका  लगी खोलने |
कह रविकर हरसाय, ख़ुशी से बीते हरदिन,
माता की नवरात, मास फलदायक आश्विन ||

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर बढ़िया लिक्स..

    ReplyDelete
  2. वाह ... बेहतरीन

    ReplyDelete
  3. बहुत बढ़िया!
    अब तो इन कुण्डलियों का संग्रह छपवा ही लीजिए!

    ReplyDelete