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Tuesday, 30 October 2012

विदुषी ज्योतिष से जुड़ी, गत्यात्मक सन्दर्भ -




अधूरे सपनों की कसक (22) !

रेखा श्रीवास्तव  
दीदी संगीता पुरी जी  
  विदुषी ज्योतिष से जुड़ी, गत्यात्मक सन्दर्भ ।
एक एक जोड़ें कड़ी, पढ़ें समय का गर्भ ।
पढ़ें समय का गर्भ , समर्पित कर दी जीवन ।
वैज्ञानिक सी दृष्टि, देखता श्रेष्ठ समर्पण ।
पूज्य पिता का क्षेत्र, जोड़ संगीता हरषी ।
शुभकामना अपार, जरा स्वीकारो विदुषी ।।

इश्क

expression 

झूठा चंदा खा रहा, जहाँ व्यर्थ सी कौल ।
वहीँ चांदनी दे जमा, वहीँ पीठ पर धौल ।
वहीँ पीठ पर धौल, छला था नारि गौतमी ।
कभी नहीं बन सका, शकल से सही आदमी ।
छुपते छुपे छुपाय, छकाये छली अनूठा ।
धीरे शकल दिखाय, बनाए बातें झूठा ।।


करवाचौथ की फुलझड़ियाँ ("माहिया" में पति पत्नी की चुहल बाजी

Rajesh Kumari  

 पूछा अपने दोस्त से, ओ पाजी सतवंत ।
सन बारह का हो रहा, दो महीनों में अंत ।
दो महीनों में अंत, बुरा दिन एक बताना ।
और कौन सा भला, दिवस वह भी समझाना ।
कहता है सतवंत, बुरा दिन साल गिरह का ।
बढ़िया करवा चौथ, बोल कर पाजी चहका ।। 
 

आओ फिर चुपचाप, तनिक दूँ लगा आलता -
  लगा आलता पैर में, बना महावर लाख |
मार आलथी पालथी, सेंके आशिक आँख |
सेंके आशिक आँख, पाख पूरा यह बीता |
शादी की यह भीड़, पाय ना सका सुबीता |
बिगड़े हैं  हालात, प्रिये पद-चाप सालता |
आओ फिर चुपचाप, तनिक दूँ लगा आलता ||

सुता-शांता : सर्ग 2

  श्री राम की सहोदरी : भगवती शांता

पुन: प्रकाशित 

भाग-1

जन्म-कथा 

कौशल्या भयभीत हो, ताके संबल एक |
पावे रक्षक भ्रूण का,  दीखे शत्रु अनेक ||    
सारे देवी-देवता, चिंतित रही मनाय |
चार दिनों से अनमयस्क, बैठे मन्दिर जाय  ||

जीवमातृका  वन्दना, माता  के  सम पाल |
जीवमंदिरों को सुगढ़, रखती सदा संभाल ||
धनदा  नन्दा   मंगला,   मातु   कुमारी  रूप |
बिमला पद्मा वला सी, महिमा अमिट-अनूप ||


स्पर्श

 धर्म कर्म से लौ लगी,  बाती जलती जाय  |
करे प्रकाशित कोष्ठ-मन, जग जगमग कर जाय |
जग जगमग कर जाय, करे ना चिंता अपनी |
कर्म करे अनवरत, तभी तो देह सिमटनी |
करे प्राप्त घृत तेल, नियामक बने मर्म से |
होवे सेहतमंद, लगे फिर धर्म कर्म से ||

ओ बंजारे

Dr.NISHA MAHARANA 
 जारा अपना तन बदन, जारी अपनी चाह ।
चला काफिला जा रहा, पकडे सीधी राह ।
पकडे सीधी राह, जिन्दगी हमें छली है ।
  काम क्रोध मद त्याग, लालसा बड़ी खली है ।
कला गीत संगीत, आपसी भाई चारा ।
चीजे ये अनमोल, लिए गाये बंजारा ।।

अस्सी घाट, शरद पूर्णिमा और चाँदनी की पदचाप

देवेन्द्र पाण्डेय  
अमृत वर्षा से हुई, श्वेत खीर अभिसिक्त ।
छक कर खाई है सुबह, उदर नहीं है रिक्त।
उदर नहीं है रिक्त, टेस्ट मधुमेह कराना ।
भले चित्र अवलोक, चित्त में इन्हें समाना ।
चित्रकार आभार, परिश्रम का फल पाओ ।
स्वस्थ रहे मन-बदन, और भी चित्र दिखाओ ।। 
 

12 comments:

  1. बहुत खूब लिखा रविकर भाई जी मेरी रचना माहिया को भी शामिल किया ह्रदय से आभारी हूँ

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  2. बहुत खूब,,,,शानदार रोले,कुण्डलियाँ,,,,,बधाई
    आपकी एक कुंडली मेरे पोस्ट पर भी हो जाय,,,,

    RECENT POST LINK...: खता,,,

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  3. bahut acche links bahut bahut dhanyavad nd aabhar....

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  4. आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (31-10-12) को चर्चा मंच पर | जरूर पधारें | सूचनार्थ |

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  5. बहुत सुन्दर हमेशा की तरह्

    ReplyDelete
  6. झूठा चंदा खा रहा, जहाँ व्यर्थ सी कौल ।
    वहीँ चांदनी दे जमा, वहीँ पीठ पर धौल ।
    वहीँ पीठ पर धौल, छला था नारि गौतमी ।
    कभी नहीं बन सका, शकल से सही आदमी ।
    छुपते छुपे छुपाय, छकाये छली अनूठा ।
    धीरे शकल दिखाय, बनाए बातें झूठा ।।

    छटी छटा फैलाए बढिया रविकर भइया.

    ReplyDelete

  7. पूछा अपने दोस्त से, ओ पाजी सतवंत ।
    सन बारह का हो रहा, दो महीनों में अंत ।
    दो महीनों में अंत, बुरा दिन एक बताना ।
    और कौन सा भला, दिवस वह भी समझाना ।
    कहता है सतवंत, बुरा दिन साल गिरह का ।
    बढ़िया करवा चौथ, बोल कर पाजी चहका ।।

    हमारी टिपण्णी सब गायब हैं मांजरा क्या है ?देखें ये रहती है कब तक सलामत .

    बढ़िया रचना है अपने में परिपूर्ण .

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  8. एक इशारा भर ही होगा
    बस टिप्पणी बक्से में काफी
    जिससे अगली बार न करें
    हम ऐसी कोई गुस्ताखी।

    तो सुनों ध्यान से जरा इत्मीनान से ,केकड़ा मनोवृत्ति छोड़ों ,दूसरों के ब्लॉग पे भी जाया करो .महानता बोध से खुद को न भरमाया करो .कभी आया जाया करो .यहाँ वहां बे -मकसद बे -इरादा .




    वह खालिस जाँ निसार करते हैं जिस पर आशिक ,

    जानेमन तेरे तसव्वुर में उसे पा ही गया .

    क्या बात है .

    TUESDAY, 30 OCTOBER 2012

    विदुषी ज्योतिष से जुड़ी, गत्यात्मक सन्दर्भ -



    अधूरे सपनों की कसक (22) !
    रेखा श्रीवास्तव
    मेरी सोच

    दीदी संगीता पुरी जी
    विदुषी ज्योतिष से जुड़ी, गत्यात्मक सन्दर्भ ।
    एक एक जोड़ें कड़ी, पढ़ें समय का गर्भ ।
    पढ़ें समय का गर्भ , समर्पित कर दी जीवन ।
    वैज्ञानिक सी दृष्टि, देखता श्रेष्ठ समर्पण ।
    पूज्य पिता का क्षेत्र, जोड़ संगीता हरषी ।
    शुभकामना अपार, जरा स्वीकारो विदुषी ।।

    रविकर भाई !ज्योतिष में कोई एक समान प्रागुक्ति विधान नहीं है दस ज्योतिष 11 भविष्य फल .जैसे पैथोलोजिकल लैब हो .
    "what quakery is to medicine so is astrology to astronomy .

    astrolgy is the predictional part of astronomy ,but in want of a universal methodology it is not relaible .

    बढ़िया प्रस्तुति .

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  9. बढ़िया प्रस्तुति .बढ़िया चुहल बाज़ी है ,"माहिया" का बतरस है .

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  10. बहुत सुंदर चर्चा ..
    परंपरागत ज्‍योतिष में जो खूबिया या खामियां रही हो ..
    पर हमारे शोध के बाद ज्‍योतिष शास्‍त्र से विज्ञान बन गया है ..
    इस वीडियो से इसे साफ साफ समझा जा सकता है!!

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