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Monday, 22 October 2012

रविकर पहली डेट, बना दी मुझको मामा-



चींटी और हाथी !

संतोष त्रिवेदी 

अपनी काया से डबल, दौड़ उठा कर बोझ ।
हाथी हारेगा बड़ा, चींटी जीते सोझ ।
चींटी जीते सोझ, खोज लेती झट दुश्मन ।
अंकुश करे गुलाम, बंधे हाथी झट बंधन ।
रहना सदा सचेत, चीटियाँ होती कटनी ।
चटनी जैसा चाट, दिखाएँ ताकत अपनी ।।


सड़क पर जिंदगी

देवेन्द्र पाण्डेय 
 बेचैन आत्मा
जयकारा यह सड़क का, तड़क भड़क शुभ शान ।
मस्त मस्त सब शेर हैं, सड़कें जान जहान ।
सड़कें जान जहान, गली पगडण्डी पाले ।
पा ले जीवन लक्ष्य, उतरता जो नहिं *खाले ।
खा ले सड़क प्रसाद, धूल फांके सौ बारा ।
देता रविकर दाद, करूँ शायर जयकारा ।।
*नीचे 


ये वक्त भी बदल जाएगा

Maheshwari kaneri  
 
तारतम्य सुन्दर बना, सुन्दर सरस प्रवाह |
रविकर
अब खामोश हो, कहे वाह ही वाह ||


"गीत गाना जानते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 
फूलों को गर चाहते, करो शूल से प्रीत |
विरह गीत जो गा सके, सके स्वयं को जीत ||

पहली डेट 
जामा पौधा प्यार का, पहला पहला प्यार ।
फूला नहीं समा रहा, तन जामा में यार । 
तन जामा में यार, घटा कैफे में  नामा ।
मुझे पजामा बोल, करे जालिम हंगामा ।
रविकर पहली डेट, बना दी मुझको मामा ।
 करे नया आखेट, भागती खींच पजामा ।।

8 comments:

  1. बहुत बढिया।

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  2. बहुत बढिया, अच्छे ..मुझे स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार..रविकर जी..

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  3. आपकी पोस्ट बुधवार (24-10-2012) को चर्चा मंच पर । जरुर पधारें ।
    सूचनार्थ ।

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  4. आपकी काव्यमयी टिप्पणी बहुत अच्छी रही!

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  5. ज्वार-खेत को खा रहा, पापा नामक कीट-
    पहली डेट
    जामा पौधा प्यार का, पहला पहला प्यार ।
    फूला नहीं समा रहा, तन जामा में यार ।
    तन जामा में यार, घटा कैफे में नामा ।
    मुझे पजामा बोल, करे जालिम हंगामा ।
    रविकर पहली डेट, बना दी मुझको मामा ।
    करे नया आखेट, भागती खींच पजामा ।।

    भाई साहब अब ई तो गजब होइगवा सगरी टिपण्णी गायब हुई गवा .

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  6. भाई साहब अब ई तो गजब होइगवा सगरी टिपण्णी गायब हुई गवा .

    ज्वार-खेत को खा रहा, पापा नामक कीट-
    पहली डेट
    जामा पौधा प्यार का, पहला पहला प्यार ।
    फूला नहीं समा रहा, तन जामा में यार ।
    तन जामा में यार, घटा कैफे में नामा ।
    मुझे पजामा बोल, करे जालिम हंगामा ।
    रविकर पहली डेट, बना दी मुझको मामा ।
    करे नया आखेट, भागती खींच पजामा ।।

    भाई साहब अब ई तो गजब होइगवा सगरी टिपण्णी गायब हुई गवा .

    बहुत बढिया प्रस्तुति है रविकर जी की ब्लॉग जगत के दिनकर जी की .बधाई .

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  7. बढ़िया लिंक्स
    विजयादशमी की शुभकामनाए!!

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