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Saturday, 2 February 2013

नाबालिग की पार्टी, मने वहाँ पर जश्न -



शैतानों तानों नहीं,  कामी-कलुषित देह ।
तानों से भी डर मुए,  कर नफरत ना नेह ।
कर नफरत ना नेह, नहीं संदेह बकाया ।
बहुत बकाया देश, किन्तु बिल लेकर आया ।
छेड़-छाड़ अपमान, रेप हत्या मर-दानों ।
सजा हुई है फिक्स, मिले फांसी शैतानों ।।

लाठी हत्या कर चुकी, चुकी छुरे की धार |
कट्टा-पिस्टल गन धरो, बम भी हैं बेकार |
बम भी हैं बेकार, नया एक अस्त्र जोड़िये |
सरेआम कर क़त्ल, देह निर्वस्त्र छोड़िए | 
नाबालिग ले  ढूँढ़, होय बढ़िया कद-काठी |
मरवा दे कुल साँप,  नहीं टूटेगी लाठी ||


छेड़-छाड़ अपमान, रेप हत्या मर-दानों -

नाबालिग की पार्टी, मने वहाँ पर जश्न ।
जमा जन्म-तिथि देखकर, फँसने का क्या प्रश्न ।
फँसने का क्या प्रश्न, चलो मस्ती करते हैं ।
है सरकारी छूट, नपुंसक ही डरते हैं ।
पड़ो एकश: टूट, फटाफट हो जा फारिग ।
चार दिनों के बाद, रहें ना हम नाबालिग ।।


बाजारू माहौल है, सड़ा-गला सब बेंच |
बेन्च-मार्क होवे अगर, फिर काहे का पेंच |

फिर काहे का पेंच, दुकाने ऊँची ऊँची |
काट खटाखट पेस्ट, मिले ना कहीं समूची |

बेचारा इन्सान, कहाँ पर करे तकाजा |
नाम हिन्दु इस्लाम, बजाये मारू बाजा ||


करे पिता दो साल कम, लिखवाते जब नाम ।
छोटे की दादागिरी, करता खोटे काम ।
करता खोटे काम,  पिताजी बुढ्ढे  होते ।
पचपन में सीनियर, सिटीजन टिक्कस ढोते ।
उम्र होय जब साठ, पुत्र सत्तर बतलाता ।
अस्सी में जब मरें, वही सौ पार कराता ।।
 

बालिग़ जब तक हो नहीं, चन्दा-तारे तोड़ ।
मनचाहा कर कृत्य कुल, बाहें रोज मरोड़ ।
बाहें रोज मरोड़, मार काजी को जूता ।
अब बाहर भी मूत, मोहल्ले-घर में मूता ।
चढ़े वासना ज्वार, फटाफट हो जा फारिग ।
फिर चाहे तो मार, अभी तो तू नाबालिग ।।

अंधी देवी न्याय की, चालें डंडी-मार |
पलड़े में सौ छेद हैं, डोरी से व्यभिचार |

डोरी से व्यभिचार, तराजू बबली-बंटी  |
देता जुल्म नकार, बजे खतरे की घंटी |

अमरीका इंग्लैण्ड, जुर्म का करें आकलन |
कड़ी सजा दें देश, जेल हो उसे आमरण ||


बत्तीसी सचमुच गली, इडली डोसा खाय |
गली गली में आ-ग-ले, बेंचे बड़े बनाय |
बेंचे बड़े बनाय, नमक मिर्ची भी डालो |
हथ-गोले सी शक्ल, चलो आसमाँ उठा लो |
पकड़ो पूरी प्लेट, स्वाद लो रत्ती-रत्ती  |
मरे धूर्त कै-मरा, हुई गुल थियेटर बत्ती ||

11 comments:

  1. वाह: बहुत बढ़िया..आभार..

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  2. छेड़-छाड़ अपमान, रेप हत्या मर-दानों -
    नाबालिग की पार्टी, मने वहाँ पर जश्न ।
    जमा जन्म-तिथि देखकर, फँसने का क्या प्रश्न ।
    फँसने का क्या प्रश्न, चलो मस्ती करते हैं ।
    है सरकारी छूट, नपुंसक ही डरते हैं ।
    पड़ो एकश: टूट, फटाफट हो जा फारिग ।
    चार दिनों के बाद, रहें ना हम नाबालिग ।।

    अब किशोर कसाब आयेंगे इस देश पे हमला करके -हम उस देश के वासी हैं जहां किशोरअपराधी रहतें हैं .

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  3. छेड़-छाड़ अपमान, रेप हत्या मर-दानों ।
    सजा हुई है फिक्स, मिले फांसी शैतानों ।।

    बढ़िया भाषिक प्रयोग .

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  4. अंधी देवी न्याय की, चालें डंडी-मार |
    पलड़े में सौ छेद हैं, डोरी से व्यभिचार |

    डोरी से व्यभिचार, तराजू बबली-बंटी |
    देता जुल्म नकार, बजे खतरे की घंटी |

    अमरीका इंग्लैण्ड, जुर्म का करें आकलन |
    कड़ी सजा दें देश, जेल हो उसे आमरण ||

    अपना मोलड़ चुप रहता है राष्ट्रीय मसलों पर ,युवा प्रिंस कहलाय .

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  5. नानी मरती इसकी वारदाता जब हो जाय .

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  6. बालिग़ जब तक हो नहीं, चन्दा-तारे तोड़ ।
    मनचाहा कर कृत्य कुल, बाहें रोज मरोड़ ।
    बाहें रोज मरोड़, मार काजी को जूता ।
    अब बाहर भी मूत, मोहल्ले-घर में मूता ।
    चढ़े वासना ज्वार, फटाफट हो जा फारिग ।
    फिर चाहे तो मार, अभी तो तू नाबालिग ।।

    सटीक शानदार प्रस्तुति ,,,,बधाई रविकर जी,,,,

    RECENT POST शहीदों की याद में,

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  7. सारा जग चालाक हैं, रखे पूत का ख्याल |
    पहली कक्षा में दिया, चुरा लिया दो साल |
    चुरा लिया दो साल, बहुत आगे की सोंचे |
    बीस साल तक छूट, कहीं यदि रेप-खरोंचे |
    बचे सजा से साफ़, कदाचित हो हत्यारा |
    लास्ट लाउडली लॉफ़, न्याय अन्धा संसारा ||

    विचार और भाव का सशक्त सम्प्रेषण .एक दम से प्रासंगिक व्यंग्य रचना .

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  8. करे पिता दो साल कम, लिखवाते जब नाम ।
    छोटे की दादागिरी, करता खोटे काम ।
    करता खोटे काम, पिताजी बुढ्ढे होते ।
    पचपन में सीनियर, सिटीजन टिक्कस ढोते ।
    उम्र होय जब साठ, पुत्र सत्तर बतलाता ।
    अस्सी में जब मरें, वही सौ पार कराता ।।


    विचार और भाव का सशक्त सम्प्रेषण .एक दम से प्रासंगिक व्यंग्य रचना .

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