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Monday, 25 February 2013

वोट बैंक का खेल, नजर सबकी हाउस पर-




पीएम पद की मिठाई खाने की लालसा : दैनिक जनवाणी 26 फरवरी 2013 स्‍तंभ 'तीखी नज़र' में प्रकाशित




 मायावी दिल्ली किला, जिला-जीत जम जाँय । 
जिला मिला मुर्दा रखें, मुद्दा दें भटकाय । 


मुद्दा दें भटकाय, नजर तख्ते-ताउस पर । 
वोट बैंक का खेल, नजर सबकी हाउस पर । 

पटना पटनाएक, जया ममता बहकाया ।  
 चूक रहे चौहान, चूकते मोदी माया ॥ 


  (विष्णु बैरागी) 

 एकोऽहम्
सौदायिक बिन व्याहता, करने चली सिंगार |
गहने पहने मांग कर, लेती कई उधार |

(भाजपा की ओर इशारा)


 लेती कई उधार, खफा पटना पटनायक | 
 खानम खाए खार, करे खारिज खलनायक |
(जदयू, बीजद , मुस्लिम) 

हौदा हाथी रहित, साइकिल बिना घरौंदा |
 नहीं हिन्दु में ताब, पटे ना मोदी सौदा ||

(माया-मुलायम)
सौदायिक= स्त्री-धन नइखे= नहीं

गोरु गोरस गोरसी,  गौरैया गोराटि ।
  गो गोबर गोसा गणित, गोशाला परिपाटि । 
 
गोशाला परिपाटि, पञ्च पनघट पगडंडी ।
पीपल पलथी पाग, कहाँ सप्ताहिक मंडी । 
 
गाँव गाँव में जंग,  जमीं जर जल्पक जोरू । 
 भिन्न भिन्न दल हाँक, चराते रहते गोरु ॥ 
गोसा=गोइंठा / उपला
गोरसी = अंगीठी 
गोरु = जानवर 
गोराटि = मैना 
पाग=पगड़ी  
जलपक =बकवादी  

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-23

सुंदरी सवैया 
बलुई कलकी ललकी पिलकी जल-ओढ़ सजी लटरा मुलतानी ।
मकु शुष्क मिले कुछ गील सने तल कीचड़ पर्वत धुर पठरानी ।
कुल जीव बने सिर धूल चढ़े, शुभ *पीठ तजे, मनुवा मनमानी ।
मटियावत नीति मिटावत मीत, हुआ *मटिया नहिं पावत पानी ||
*देवस्थान / आसन                       *लाश
कुंडलिया 
गीली ठंडी शुष्क मकु, मिटटी *मिट्ठी मीठ |
मिटटी के पुतले समझ, मिटटी ही शुभ पीठ |
मिटटी ही शुभ पीठ, ढीठ काया की गड़बड़ |
मृदा चिकित्सा मूल, करो ना किंचित हड़-बड़ |
त्वचा दोष ज्वर दर्द, देह पड़ जाए पीली |
मिटटी विविध प्रकार, लगा दे पट्टी गीली ||

5 comments:

  1. बहुत खूब बहुत अच्छे लिंक दिए है आपने

    मेरी नई रचना
    ये कैसी मोहब्बत है

    खुशबू

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  2. बहुत खूब लिखा है | अन्नंद आ गया पढ़कर | बधाई |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  3. वाह जी वाह ... आपका अनूठा रचना परिचय ... बहुत भाया ...

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  4. गाँव गाँव में जंग, जमीं जर जल्पक जोरू ।
    भिन्न भिन्न दल हाँक, चराते रहते गोरु ॥
    Sateek !

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