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Friday, 8 February 2013

पाए ना फल भिन्न, होय बैलट ही बोगस -





डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 


बोगस वोटिंग हो रही, वेटिंग इक सप्ताह ।
चौदह जन तैयार मन, आह वाह हो स्वाह ।

आह वाह हो स्वाह, हवा बहती बासंती ।
 आज बढ़ी उम्मीद, छाप दी एक तुरंती ।

लेकिन रविकर खिन्न, करे तन मन से फोकस ।
पाए ना फल भिन्न, होय बैलट ही बोगस ।

madhu singh 
 Benakab  
 समाकलन गम का किया, हो काया अवकलित ।
वृत्त-वृहत्तर दिख रहीं, कई कलाएं ललित ।

कई कलाएं ललित, फलित ज्योतिष विचराया ।
विगड़ गया भूगोल, फैक्टर फिर समझाया।

जोड़ जोड़ में दर्द, गुणक घातांक मारता ।
भाग भाग दुर्भाग्य, माइनस हुआ हारता ।। 


 बूँद..बूँद...लम्हे.... 

कृष्णा चोरी में मगन, बूझे नहीं बसन्त |
माखन के पीछे लगा, व्यापे नहिं रतिकन्त | 


व्यापे नहिं रतिकन्त, अंत तक वही छलावा |
लुकना छिपना पंथ, शहर से मिला बुलावा |


किन्तु भरोसा एक,  मिटाए वो ही तृष्णा |
छलिया भरे अनेक, किन्तु बढ़िया है कृष्णा ||

पिछड़ता भारत ..... डा श्याम गुप्त.....




बेहतर है तकनीक पर, लगे कमीशन नीक ।
करते नित्य प्रपंच छल, दावे सकल अलीक ।
दावे सकल अलीक, गले ना दलिया दलहन ।
लगा रहे जो तेल, पूर ना पड़ता तिलहन ।
नीति नियम में दोष, तंत्र षड्यंत्री रविकर ।
खाली होता कोष, होय दिन कैसे बेहतर ।।


कार्टून :- आज चि‍नार में आग लगी है

kaajal-कुमार 

बैंड बजा देगी खबर, असर प्रभावी होय |
नई पीढ़ियाँ तोड़ के, देंगी धर्म बिलोय |

देंगी धर्म बिलोय , अगर ऐसा ही होता |
आजादी ले छीन, पुरानी पद्धति ढोता |

करिए क्रमिक सुधार, राय अपनी दे जाओ |
लेकिन हरगिज नहीं, जोर अपना अजमाओ |


परसेंटेज का कर रहा, खुलकर खेल खबीस ।
 ग्रोथ-रेट बस पाँच की, मिले कमीशन बीस ।

मिले कमीशन बीस, रीस मन ही मन करता ।
फिफ्टी फिफ्टी बंटे, अभी तो बहुत अखरता ।

खेत खान विकलांग, सभी का बढ़ा पेट है ।
चलो खरीदो वोट,  बोल क्या ग्रोथ रेट है -

भारतीय लोक-तंत्र

*सराजाम सारा जमा, रही सुरसुरा ^सारि |
सुधा-सुरा चौसर जमा, जाम सुरासुर डारि |

जाम सुरासुर डारि, खेलते दे दे गारी |
पौ-बारह चिल्लाय, जीत के बारी बारी |
जो सत्ता हथियाय, सुधा पी देखे मुजरा  |
 जन-गण जाये हार, दूसरा मद में पसरा ।।
*सामग्री  ^चौपड़ की गोटी

6 comments:

  1. अच्छे लिंक्स सर!
    मेरी रचना को स्थान देने का आभार !
    ~सादर!!!

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  2. बहुत अच्छे सूत्रों से सजी चर्चा बहुत सुन्दर व् भावात्मक प्रस्तुति ये क्या कर रहे हैं दामिनी के पिता जी ? आप भी जाने अफ़रोज़ ,कसाब-कॉंग्रेस के गले की फांस

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  3. बहुत ही बढ़िया है आज की प्रस्तुती।

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