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Tuesday, 5 February 2013

*'आई' आये समय पर, कुदरत का आईन-


यादें !!! सुहाने लम्हों की ....

Ashok Saluja

 *'आई' आये समय पर, कुदरत का आईन |
सप्त-वार के वारि में, मस्त तैरती मीन |

मस्त तैरती मीन, सीन सब याद पुराने |
कौन सकेगा छीन, तुम्हारे गीत-सुहाने |

लम्हे लम्हें याद, यही तो है *मनुसाई |
दूर रहो या पास, हृदय में "यादें" आई |
आई = मौत
मनुसाई = पराक्रम

लेकिन पाकिस्तान, हिन्दु का करे कलेवा-


मेवा खा के पाक का, वाणी-कृष्णा-लाल |
ठोके कील शकील नित, वक्ता करे हलाल  |

वक्ता करे हलाल, कमाई की कमाल की |
मनमोहन ले पाल, ढाल यह शत्रु-चाल की |

लेकिन पाकिस्तान, हिन्दु का करे कलेवा |
खावो कम्बल ओढ़, मियाँ सेवा का मेवा ||


हास्य-व्यंग्य दोहे

Ambarish Srivastava 

बेल बेल के पत्र से, शिव की पूजा होय |
बेलन से पति-*पारवत, पारवती दे धोय ||
पारवत=कबूतर


अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) 
 तिनके को भी सिद्धकर, कह सकते मल-खम्भ |
तर्क-शास्त्र में दम बड़ा, भरा पड़ा है दम्भ |

भरा पड़ा है दम्भ, गलतियाँ क्यूँकर मानें |
आठ-आठ हो साठ, विद्वता जिद है ताने |

होवे गलती सिद्ध, मगर वो ऐसे *पिनके |
बके अनाप-शनाप, तोड़ जाता कुल तिनके ||

*क्रोधित
तिनके तोडना=सम्बन्ध ख़त्म करना
 यारो चारो ओर हैं, भरे चोर मक्कार |
रहना इनके बीच है, ये ही तो सरकार |
ये ही तो सरकार, *सपदि सरकस सर काटे |
सिंह-शावकों बीच, नीच टुकड़े कर बाँटे |
सात समंदर पार, वहाँ भी मारो मारो |
बसते रिश्तेदार, प्यार से कटिए यारो ||

*तुरंत

सड़क

Asha Saxena 



कहाँ जा रही हे! सड़क, होवे बेडा गर्क |
गड्ढे ही गड्ढे भरे, लगे जर्क पर जर्क |
लगे जर्क पर जर्क, फर्क पूरा दिखता है |
दिल्ली आलीशान, यही फोटो बिकता है |
पर खुल जाए पोल, बाढ़ से सड़क बही है |
यू पी संग बिहार, कहीं पर सही नहीं है ||


ये ख्याल अच्छा है !

पी.सी.गोदियाल "परचेत" 

बड़े तराशे शब्द हैं, सुन्दर भाव तलाश |
जब पलाश खिलते मिलें, हो बसंत उल्लास ||

Rajesh Kumari 



कारीगरी अजीब है, तोला-मासा होय |
इंद्र-धनुष से रंग सब, आये जाय विलोय |
आये जाय विलोय, कूचिका बनी बिचारी |
देख विभिन्न विचार, डुबोये बारी बारी |
सात रंग से श्वेत, हुई पर काली सारी |
हाय हाय रे हाय, गजब रविकर चित-कारी ||


  Aruna Kapoor  

 विधिना लिखकर सो गए, अपने अतुल विधान |
सरेआम अदना अकल, डाले नए निशान |
डाले नए निशान, शान से कविता रचते |
उद्वेलित हो हृदय, तहलके जमके मचते |
स्वान्त: लिखूं सुखाय, जानता रविकर इतना |
पुरस्कार जो पाय, आय हमको वह विधि- ना ||

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)

 पाता गुरु-गृह में सदा, दूजा जन्म मनुष्य |
देते विद्या बुद्धि बल, गुरुवर के गुरु *तुष्य |
गुरुवर के गुरु *तुष्य , बदल देते तिथि वासर |
पाकर नव उपहार, हार ना होती रविकर |
गुरुजन का वह स्नेह, सदा ही राह दिखाता |
कच्चा घट पक जाय, सही आकृति तब पाता ||
*शंकर 


 उच्चारण

कुछ बात तो है .....


संगीता स्वरुप ( गीत ) 

३३
६६
६३
३६
तैतिस वर्षों से करे, तन-मन-जीवन तीन |
ख्वाहिश-खुशियाँ-वेदना, दोनों तीन प्रवीन |
दोनों तीन प्रवीन, चलो छाछठ तक दीदी |
पुत्र-पुत्रियाँ-पौत्र, सूत्र से नव-उम्मीदी |
रहो स्वस्थ चैतन्य, सदा तिरसठ सम हर्षो |
दे जाता छत्तीस, विविधता तैंतिस वर्षों ||

15 comments:

  1. सुन्दर लिंकों एव सार्थक टिप्पड़ियों के साथ बहुत ही सुन्दर सृजन।

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  2. बहुत अछे लिंक आभार ....

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  3. बे -सऊर सही शकील एहमद साहब इन्हें इतिहास भूगोल की समझ भले न हो थोड़ी संवेदना तो हो -१९४७ से पहले पाक का कोई अंश था जो कुछ था वह भारत था .मुशर्रफ से क्यों नहीं पूछते शकील एहमद वह भारत छोड़ के पाकिस्तान क्यों चले गए .

    १४ अगस्त को यौमे आज़ादी मनाने से पाक का अस्तित्व भारत से अर्वाचीन नहीं हो जाता .

    अंग भंग किये गए लोग उधर के हिस्से के हिन्दुस्तान से ही इधर आये थे .आडवाणी साहब तो पहले भी भारत में थे अब भी हैं .

    ReplyDelete
  4. बे -सऊर सही शकील एहमद साहब इन्हें इतिहास भूगोल की समझ भले न हो थोड़ी संवेदना तो हो -१९४७ से पहले पाक का कोई अंश था जो कुछ था वह भारत था .मुशर्रफ से क्यों नहीं पूछते शकील एहमद वह भारत छोड़ के पाकिस्तान क्यों चले गए .

    १४ अगस्त को यौमे आज़ादी मनाने से पाक का अस्तित्व भारत से अर्वाचीन नहीं हो जाता .

    अंग भंग किये गए लोग उधर के हिस्से के हिन्दुस्तान से ही इधर आये थे .आडवाणी साहब तो पहले भी भारत में थे अब भी हैं .

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  5. बड़े फलक की पोस्ट है आपकी .सुन्दर मनोहर .

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  6. लिंक पर आपके कमेन्ट बहुत अच्छे लगे |मैंने तो सच को अपने शब्द दिए हैं |पिचले सप्ताह ही हमारी गली की सड़क सीमेंट की बनी है |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  7. आभार रविकर जी

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  8. आप की लगन और मेहनत को प्रणाम !
    रविकर भाई जी !
    शुभकामनायें!

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  9. ...सभी लिंक्स बहुत अच्छे लगे!...आभार रविकर जी!

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  10. ..डॉ.रूपचंद शास्त्री जी!...नमस्कार!...उच्चारण ब्लॉग लॉग ऑन नहीं हो रहा है!...इससे पहले भी यही प्रोब्लम आई थी!

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