Follow by Email

Monday, 21 January 2013

साहब हाफिज सईद जी, ईष्ट सेंट-पर-सेंट-




शहनवाज-गडकरी, पार्टी यह आतंकी-

माधौ संघी करें ट्विट,  दिग्गी करें कमेन्ट ।
साहब हाफिज सईद जी, ईष्ट सेंट-पर-सेंट ।

ईष्ट सेंट-पर-सेंट, हमारे स्वामी आका ।
पार्टी लाइन यही, खींचते जाएँ खाका ।

शहनवाज-गडकरी, पार्टी यह आतंकी ।
प्यादे ऊंट वजीर, करे रानी नौटंकी ।।
नारा ढीला हो गया, निन्यानवे बटेर  |

पहुँचायें सत्ता सही, चाहे देर सवेर |



चाहे देर सवेर, गरीबी रेखा वालों |

फँसता मध्यम वर्ग, साथ अब इन्हें बुला लो  |



मँहगाई की मार, टैक्स ने भी संहारा |

लाल-कार्ड बनवाय, लगायें हम भी नारा |

"चिन्तन-मन्थन"

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) 
 उच्चारण 

शांतचित्त गुरुवर व्यथित, गीदड़ की सरकार |
कुत्ते इज्जत लूटते, नारी करे पुकार |
नारी करे पुकार, गला सैनिक का रेता |
धारदार हथियार, किन्तु बैठा चुप नेता |
इनकी जय जय कार, देश भक्तों को गाली |
सारी जनता आज, खड़ी बन यहाँ सवाली ||

मिली मुबारकवाद मकु, मणि शंकर अय्यार ।

शिंदे फर्द-बयान से, जाते पलटी मार ।


जाते पलटी मार , भतीजा होता है खुश।

नकारात्मक वार, कभी हो जाता दुर्धुष । 


हिन्दु-वाद-आतंक, शब्द लगते हैं मारक ।

हर्षित फूंके शंख, मित्र से मिली मुबारक ।।
जिसने भी भाषण लिखा, ज्ञान-पीठ दो यार ।
ठोक पीठ को प्यार से, प्रकट करो आभार ।
प्रकट करो आभार, भावनामयी प्रभावी ।
आँसू मस्ती प्यार, हमारे पी एम् भावी ।
डी एन ए की बात, सुझाई है पर किसने ।
वह ही हिन्दुस्तान, कहा कांग्रेसी जिसने ।।


माँ ने कहा सत्ता जहर की तरह है, और भारत के लोग मेरी जान है:- राहुल गांधी


अंधड़ !

जहरखुरानी में मरें, होवे एक्सीडेंट |
जोखिम में यह जान है, उखड़े तम्बू टेंट |
उखड़े तम्बू टेंट, रेंट की खातिर बन्दे |
बिन मांगे मिल जाए, झोलियाँ भर भर चंदे |
जनता माँ की जान, जहर सी सत्ता रानी |
दे बेटे को सौंप, होय ना जहर-खुरानी ||

हिन्दु-वाद-आतंक, शब्द लगते हैं मारक-


मिली मुबारकवाद मकु, मणि शंकर अय्यार ।

शिंदे फर्द-बयान से, जाते पलटी मार ।


जाते पलटी मार , भतीजा होता है खुश।

नकारात्मक वार, कभी हो जाता दुर्धुष । 


हिन्दु-वाद-आतंक, शब्द लगते हैं मारक ।
हर्षित फूंके शंख, मित्र से मिली मुबारक ।।


सोये आतंकी पड़े, छाये भाजप संघ |
आरोपी तैयार है, आओ सीमा लंघ ||
जैसे मन वैसे संहारो ||
 पेट फटे नक्सल लटे, डटे बढे उन्माद  |
गले कटे भारत बटे, लो आंसू पर दाद |
खाली कुर्सी चलो पधारो ||

चालीसवां दामिनी का, निकले आंसू आज |
कैसा यह चिंतन सखे, आस्कर इन्हें नवाज |
चालू है नौटंकी यारो ||

है वजीर यह पिलपिला, पिला-पिला के पैग-

है वजीर यह पिलपिला, पिला-पिला के पैग ।
 पैदल-कुल बकवा रहे , दे आतंकी टैग -
फिर से नई विसात बिछाये 
देश-भक्त कहलाता जाए  ।।

देश गलतियाँ भुगतता, हर पीढ़ी की चार ।
रोज गर्त में जा रहा, जिम्मा ले परिवार ।
नए नए नारे बहकाए ।
देश-भक्त कहलाता जाए  ।।

1 comment: