Follow by Email

Tuesday, 15 January 2013

मिला अभी सन्देश, नारि में शक्ति बड़ी है-





वो होती क्‍या.....

रश्मि  

शक्ति बड़ी है सोच में, गर्म गर्म एहसास |
बर्फ पिघलनी चाहिए, किन्तु करे नहिं नाश |
किन्तु करे नहिं नाश, कहीं कुछ छोटे इग्लू |
बर्फ देख मासूम, सोचती रह रह पिघलूं |
पर इग्लू को देख, सोच में आज पड़ी है |
मिला अभी सन्देश, नारि में शक्ति बड़ी है ||

सत्ता के व्यक्तव्य , सख्त हर दिन आते हैं


 हाय हाय रे मीडिया,  देश-देश का भक्त ।
टी आर पी की दौड़ सह, विज्ञापन आसक्त । 
 विज्ञापन आसक्त, आज तक पूजा बेदी ।
बलि बेदी पर शीश, मस्त है घर का भेदी ।
लगा दिया आरोप, विपक्षी भड़काते हैं ।
सत्ता के व्यक्तव्य , सख्त देखो आते हैं ।।

गर चर्चा का दौर, रखो विज्ञापन बाहर -

व्यापारी है मीडिया, सदा देखता स्वार्थ ।
विज्ञापन मछली बड़ी, आँख देखता पार्थ ।

आँख देखता पार्थ, अर्थ में दीवाना है ।
रहे बेंचता दर्द, मर्ज से अनजाना है ।
 
 नकारात्मक खबर, बने हर समय सुर्खियाँ । 
 सकारात्मक त्याज्य, लगे खुब जोर मिर्चियाँ ।।

भारतीय सेना के वीर जवानों को नमन !!

पूरण खंडेलवाल  
पुख्ता पावन वृत्तियाँ, न्यौछावर सर्वस्व |
कीर्ति पताका फहरती, धावति रविकर अश्व |
धावति रविकर अश्व , मेध चाहे हो जाए |
एक नहीं सैकड़ों, बार धड़ शीश कटाए |
मम माता तव शान, चढ़ाएंगे सिर-मुक्ता |
लेना आप पिरोय, गिनतियाँ रखना पुख्ता ||

नौनिहालों में दमे के खतरे के वजन को बढ़ाता है कबाड़िया भोजन

Virendra Kumar Sharma 

अमां दमा एक्जिमा क्या, लेते कहाँ भकोस |
मम्मी रम्मी खेलती, बाप रहे मदहोश |
बाप रहे मदहोश, टोस्ट कब तक मैं खाऊं |
खाके फ्रिज की दाल, भूख किस तरह मिटाऊं |
घर की मुर्गी नीक, किन्तु फास्ट बर्गर है यम्मा |
मैं नहिं मानू सीख, भूख से बढ़िया दम्मा ||

हक बात
सिद्दीकी साहब लिखें, एक राज पर राज |
गड़बड़झाला देख के, उठा रहे आवाज |
उठा रहे आवाज, बना कानून खिलौना |
मिटा रहे बचपना, नियम हो जाता बौना |
मातो श्री की ठाठ, यहाँ भी जय जिद्दी की |
अपना अपना राज, बड़ा मसला सिद्दीकी ||

10 comments:

  1. व्यापारी है मीडिया, सदा देखता स्वार्थ ।
    विज्ञापन मछली बड़ी, आँख देखता पार्थ ।
    बहुत उत्तम !

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति

    सादर

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर उम्दा प्रस्तुति,,,

    ReplyDelete
  4. निराला अंदाज ... छंदों में बात ... चर्चा लाजवाब ...

    ReplyDelete
  5. बढ़िया तंज सामयिक काव्य टिप्पणियाँ लिंक लिख्खाड़ पर .

    ReplyDelete
  6. हुज़ूर स्पेम से टिप्पणियाँ निकालो .

    ReplyDelete
  7. अरे वाह...रूप-अरूप भी शामि‍ल है। बहुत बढ़ि‍या व नि‍राला अंदाज है आपका..

    ReplyDelete
  8. नारी को अपनी ताकत को पहचानना होगा!
    सार्थक और सटीक टिप्पणियाँ!
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

    ReplyDelete