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Tuesday, 22 January 2013

लांछित भाजप किन्तु, राष्ट्र का बल-सम्बल है -

ZEAL 
 ZEAL
पंजा-वाले से भला, खुरवाला खुद्दार ।
परम्परागत चाल से, करे जाति-उद्धार ।

करे जाति-उद्धार, उगाये पद्म जलाशय ।
चाँद-सितारे नहीं, तोड़ता बूझ महाशय ।

गंगा गीता गाय, पूजता काट शिकंजा ।
छक्का पंजा करे,  सदा ही खूनी पंजा ।।

Virendra Kumar Sharma 

काबुल में करता रहा, तालिबान विध्वंस |
मुख्य विपक्षी है वहाँ, लगातार दे दंश |

लगातार दे डंस, बड़ा आतंकी दल है |
लांछित भाजप किन्तु, राष्ट्र का बल-सम्बल है |

फिर भी तुम बेचैन, बहुत हो जाते व्याकुल |
अंड-बंड बकवास, बनाना चाहो काबुल ||

सावधान रहने का समय है !

संतोष त्रिवेदी 
 बैसवारी baiswari 

हाथ-पैर में बल पड़े, शुरू देह में खाज |
सैनिक सेनापति खड़े, गिरे जहर की गाज |


गिरे जहर की गाज, अजब चित्रण है भाई |
फिर भी है संतोष, करें केवल उबकाई |


चलें शब्द के तीर, मीर जो मारे पहले |
जन-गण-मन को चीर, मार नहले पे दहले ||

खांटी दीदी गिरी है, रहे मौन सरदार-

Full Text: Mamata Banerjee's victory speech
खांटी दीदी गिरी है,  रहे मौन सरदार |
वाजिब हक़ की मांग भी, दे सरकार नकार |


दे सरकार नकार, हुई वो आग-बबूली |
गर बैठूं मैं मार, कहो गुंडा मामूली  |


इसीलिए लो झेल, मरे माँ मानुष-माटी |
रेल तेल का खेल, कहे दीदी यह *खांटी ||


*विशुद्ध

हिंदी की चिंदी करे, हिन्दू की तौहीन |
गंदे-बा-शिन्दे बहुत, दुनिया करे यकीन |

दुनिया करे यकीन, एक मंत्री जब बोले |
यह-आतंकी-देश, लिस्ट में शामिल हो ले |


दिला रही है अभय, चाटुकारों को थ्योरी |
हटे नाम हिट-लिस्ट, मरें अब नहीं अघोरी ||

खुर-पशु और पंजा-तंत्र !


पी.सी.गोदियाल "परचेत" 

लीडर की करते नक़ल, भेड़-चाल में लीन ।
विल्डबीस्ट खुर-पशु सदा, लगते बुद्धि विहीन  ।

लगते बुद्धि विहीन, जुबाँ लम्बी है लेकिन ।
हुआ गरदुआ रोग, करे खुरचाली हर-दिन ।

खुराफात खुर्राट, खुरखुरा मानव रविकर ।
खड़ी-खाट खटराग, किन्तु बढ़िया है लीडर ।।

खुरचाली = बुरा आचरण 


पैना पड़ता पीठ पर , लेकिन चमड़ी मोट ।
दमड़ी दमड़ी लुट गई, सहता रहता चोट ।
फोटो खिंचा रहा अनशन में ।

पैनापन तलवार सा, कैंची कतरे कान ।
सुन लो बात वजीर की, होता जो हैरान-
आग लगे उस नश्वर तन में ।।

बा-शिंदे चाहे मरें,  कांगरेस परिवार ।
अव्वल रहते रेस में, शत्रु दलों को मार -
यही इण्डिया, रहें वतन में ।।

गडके-करी समेत धन, पता पता नहिं मित्र ।
छापे पड़ने लगे जब, हालत हुई विचित्र -
बदल गया निर्णय फिर क्षण में ।।

बाप-पूत अन्दर गए, शिक्षक आये याद ।
दो दो मिल सोलह करे, शिक्षा हो बरबाद -
हरियाणा में किस्सा जन्में ।।

श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (४४वीं कड़ी)


Kailash Sharma 

रूप  दिव्यतम देखते, रोमांचित हैं पार्थ |
अनंत रूप जीवन विषद, दिखते अनंत पदार्थ |



दिखते अनंत पदार्थ , प्रभावी भक्तिमई है |
कथा प्रवाह अनंत, लिखे सोपान कई हैं |



माँ शारद का वास, रूप यह दिखा सरलतम |
शिल्प-कथ्य है श्रेष्ठ, कृष्ण का रूप-दिव्यतम ||

8 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति!
    वरिष्ठ गणतन्त्रदिवस की अग्रिम शुभकामनाएँ और नेता जी सुभाष को नमन!

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  2. आदरणीय सर प्रणाम, बेहद सुन्दर रचनायें हैं पढ़कर कर शांति की प्राप्ति हुई, हार्दिक बधाई स्वीकारें.

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  3. काबुल में करता रहा, तालिबान विध्वंस |
    मुख्य विपक्षी है वहाँ, लगातार दे डंस |

    लगातार दे डंस............(दंश ).............., बड़ा आतंकी दल है |
    लांछित भाजप किन्तु, राष्ट्र का बल-सम्बल है |

    फिर भी तुम बेचैन, बहुत हो जाते व्याकुल |
    अंड-बंड बकवास, बनाना चाहो काबुल ||

    बहुत सटीक टिपण्णी सरजी .

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  4. आभार रविकर जी इस प्रस्तुति के लिए !

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  5. उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुतिकरण के सादर आभार।

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  6. बहुत सुन्दर धार दार टिप्पणियां...

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  7. ...नहीं दिल्लगी है भली,सदा हमारे साथ,
    ठूँस जेल में भरेंगे,लम्बे मेरे हाथ :-)

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  8. मुझे तो आपकी तस्वीर बड़ी जम रही है। :)

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